भोपाल News

मालखाने से 80 लाख के जेवरात गायब होने का मामला, तत्कालीन अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

Created at - July 18, 2018, 12:16 pm
Modified at - July 18, 2018, 12:17 pm

भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने ग्वालियर जिला न्यायालय के मालखाने से गायब हुए 80 लाख रुपए के जेवरात के मामले में जस्टिस विवेक अग्रवाल ने विजिलेंस से तत्कालीन मालखाना प्रभारी न्यायाधीश आरपी सोनी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। इसके साथ ही कोर्ट ने 1990 से 2009 के बीच रहे मालखाना अधिकारियों को नियमित अंतराल में सत्यापन नहीं करने का दोषी मानते हुए विजिलेंस को उनके खिलाफ भी कार्रवाई करने का सुझाव दिया है। साथ ही मालखाने का ऑडिट कराने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने 8 जनवरी 1990 से लेकर 18 मार्च 2016 तक के बीच रहे नाजिर, नायब नाजिर और नजारत शाखा के प्रभारी को पहली नजर में दोषी मानते हुए पुलिस को उनके नाम की सूची देने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस को इस दौरान ट्रेजरी रहे अधिकारियों और उनके अधीनस्थों की भी सूची भी लेने के लिए कहा ताकि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का जा सके।

पढ़ें- भगवान भरोसे भाजपा, कांग्रेस के टोने-टोटके बेअसर करने भाजपा कार्यालय में सुंदरकांड

मंगलवार को मालखाना प्रभारी रहे एडीजे कोषालय प्रभारी और नाजिरों की भूमिका की जांच करने के आदेश विजिलेंस को दिए हैं. साथ ही पुलिस को भी आदेशित किया है कि वह माल खाने से कोषागार में जमा कराए गए गहनों के गायब होने के जिम्मेवार लोगों की तलाश करें और उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई करें। दरअसल 30 साल पहले उपनगर ग्वालियर के सोडा कुआं इलाके में रमेश चंद्र गोयल और उनकी पत्नी बसंती देवी की हत्या कर बदमाशों ने 80 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने लूटे थे। बाद में इस मामले में जगदीश सिंह और उदय सिंह आदि को गिरफ्तार किया था। उनसे 80 लाख रुपये का माल कोर्ट के मालखाने में जमा करवाया गया था।

पढ़ें- एंबुलेंस चालक की लापरवाही, प्रसव के बाद महिला और नवजात को तेज बारिश के बीच जंगल में छोड़ा

हाईकोर्ट ने 2 साल पहले दंपत्ति के वारिसों को उक्त संपत्ति वापस करने के निर्देश दिए. लेकिन जब मालखाने में गहनों को तलाशा गया तो वह जेवरात और माल गायब था। इस पर हाईकोर्ट ने जिला जज को जांच के निर्देश दिए हैं। जिला जज ने जांच करने के बाद पिछले साल एफआईआर कराई थी परंतु उसमें कोई कार्यवाही नहीं हुई। हाईकोर्ट ने मंगलवार को जिला जज की रिपोर्ट पर तत्कालीन एडीजे रहे आरपी सोनी की गलती मानी है। इसके बाद और पहले रहे विधि अधिकारियों ने भी हर 3 साल में होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया। इसे हाईकोर्ट ने गंभीर चूक माना और आदेशित किया है कि 8 जनवरी 1990 से लेकर 18 मार्च 2016 तक जितने भी नाजिर और नायब नाजिर ऑफिस इंचार्ज रहे, उन सब की भूमिका की जांच की जाए और इनके खिलाफ दोष सिद्ध होने पर कार्यवाही की जाए। कोषालय के प्रभारी और वहां के स्टाफ की भूमिका की ही पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं।

 

 

वेब डेस्क, IBC24 


Download IBC24 Mobile Apps

Trending News

Related News