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डौंडीलोहारा में डेम होते हुए भी यहां के खेत प्यासे, बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव

Created at - July 19, 2018, 4:30 pm
Modified at - July 19, 2018, 4:30 pm

जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं..छत्तीसगढ़ की डौंडीलोहारा विधानसभा से...सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर

बालोद जिले में आती है विधानसभा सीट

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र

कुल जनसंख्या-3 लाख 623

कुल मतदाता-2 लाख 3 हजार 453

पुरुष मतदाता-1 लाख 771

महिला मतदाता-1 लाख 2 हजार 682

वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा

अनिला भेड़िया हैं कांग्रेस विधायक

सियासत-

विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही डौंडीलोहारा में चुनावी रंग भी दिखाई देने लगे हैं...कांग्रेस की इस कब्जे वाली सीट पर बीजेपी जीत दर्ज करने की रणनीतियां बनाने में जुट गई है.. 

2013 के चुनावी रण में कांग्रेस ने जीत का डंका बजाया और अनिला भेड़िया विधायक चुनी गईं...अब 2018 के चुनावी समर की तैयारियां विधानसभा में दिखाई देने लगी हैं..डौंडीलोहारा में बीजेपी-कांग्रेस के अलावा छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा भी हर बार चुनावी मैदान में चुनौती पेश करता आ रहा है...लेकिन इस बार JCCJ भी चुनावी मैदान में होगी..ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी की जीत की राह आसान  नहीं होगी...जहां कांग्रेस जीत बरकरार रखने की रणनीतियां बनाने में जुट गई है..तो वहीं बीजेपी अपनी वापसी की कोशिश में है..इस बीच टिकट के दावेदार भी सामने आने लगे हैं..बात कांग्रेस की करें तो वर्तमान विधायक अनिला भेड़िया प्रबल दावेदार हैं...इसके अलावा देवलाल ठाकुर और रेवाराम रावटे भी दावेदारों में शामिल हैं..बीजेपी की बात करें तो लालमहेन्द्र सिंह टेकाम और सोमेश सोरी का नाम सबसे आगे है..बुधयारिन कुमेटी भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं..JCCJ से डोमेन्द्र भेड़िया ,राजेश चुरेन्द्र और मिथलेश नुरेटी टिकट की लाइन में हैं ।

मुद्दे-

डौंडीलोहारा में विकास के वादे और दावे तो किए गए लेकिन हालात नहीं बदले..आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है विधानसभा । डौंडीलोहारा विधानसभा में हर तरफ अभावों का बसेरा नजर आता है..कहने को तो तांदुला,खरखरा और गोदली डेम हैं लेकिन इसके बाद भी किसानों के खेत प्यासे हैं...विधानसभा में सड़कों की स्थिति भी ठीक नहीं है...ग्रामीण इलाकों में सड़कें और भी बदहाल हैं..दल्लीराजहरा में लोग जमीन के पट्टे के लिए अब भी भटक रहे हैं..विधानसभा में आयरन ओर माइंस तो हैं लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार मिल नहीं पा रहा है..अगर मिल रहा है तो केवल प्रदूषण..हालत ये है की माइंस के चलते दल्लीराजहरा का आधा इलाका उजड़ चुका है..शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं..ग्रामीण इलाकों में संचालित स्कूल अब भी शिक्षकों के इंतजार में हैं..तो वहीं छात्रवासों में सुविधाओं का अभाव हैं...शिक्षा की तरह ही स्वास्थ्य सुविधाएं हैं..अस्पतालों में ना डॉक्टर हैं ना संसाधन ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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