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पिता के सच होते सपनों की बेहतर कहानी फन्ने खां

Created at - August 3, 2018, 7:23 pm
Modified at - August 3, 2018, 7:23 pm

इस शुक्रवार एक साथ तीन फिल्में रिलीज हुई हैं ऐशवर्या राय बच्चन, अनिल कपूर, राजकुमार राव की 'फन्ने खां' ,इरफान खान की 'कारवां' और तीसरी फिल्म है ऋषि कपूर, तापसी पन्नू की 'मुल्क'. लेकिन फ़िल्मी लवर्स के लिए एक अच्छी बात यह है कि तीनों फिल्मों का टेस्ट अलग अलग है। इसलिए आप इसका मजा भी अलग अलग दिन ले सकते हैं। 

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सबसे पहले बात करते हैं फन्ने खां की...ये फिल्म है एक पिता के सपनों और उम्मीदों की कहानी जिन्हें उन्हें फन्ने खां के नाम से जानते हैं प्रशांत उर्फ फन्ने खां (अनिल कपूर) का सपना था कि वो म्यूजिक डायरेक्टर बनने का लेकिन वो ऐसा कर नहीं पाया तभी उसका सपना है कि वो अपनी बेटी लता (पीहू) को सिंगर बनाना चाहता है लेकिन लता को अपने पिता प्रशांत का गाने का अंदाज ओल्ड फैशन लगता है क्योंकि वो दीवानी है सिंगिंग स्टार बेबी सिंह (ऐश्वर्या राय बच्चन)की और लता बेबी सिंह की तरह बनना चाहती है लेकिन वो बॉडी शेमिंग का शिकार हो जाती है ओवर वेट होने के कारन  लोग उसका मजाक उड़ाते हैं जिससे उसका दिल टूट जाता है.इसी दौरान  प्रशांत अपने दोस्त अदीर के साथ मिलकऱ अपनी बेटी का एलबम निकालना चाहता है। लेकिन इनकी ज़िंदगी में एक बदलाव तब आता है जब इनकी फैक्ट्री बंद हो जाती है। और उसके सपने टूटने लगते हैं ऐसे वो टैक्सी चलाता है अपनी गरीबी  से परेशान पिता की टेक्सी में एक दिन बैठती है  बेबी सिंह और वो उसे किडनैप कर लेता है और उसका साथ देता है उसका खास दोस्त अदीर (राजकुमार राव) अब अदीर और प्रशांत मिलकर बेबी सिंह को किडनैप करते हैं वो कैसे उसने चंगुल से बाहर निकलेगी क्या लता सिंगर बन पाती है। अदीर का क्या होता है ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

 

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ऐशवर्या राय बच्चन ने अपनी एक्टिंग से नहीं बल्कि खूबसूरती का तड़का लगाया है फिल्म में उनका रोल कम है उन पर दो गानें फिल्माए गए हैं दोनों ही खूबसूरत है। वहीं राजकुमार राव अदीर के रोल में खूब जमे है अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी दोस्ती यारी देखकर आप इंप्रेस हो जाएंगे वो जब भी पर्दे पर आते हैं आप खुश हो जाएंगे. वहीं ये पूरी फिल्म अनिल कपूर यानि एक बाप के सपनों और उम्मीदों पर टिकी हुई है। वहीं फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी रफ्तार है कहानी थोड़ी और मजबूत होनी चाहिए थी। अनिल कपूर और राजकुमार जैसे शानदार कलाकार होने के बाद भी फिल्म फीकी नजर आती है। ये एक म्यूजिकल ड्रामा बेस्ड फिल्म है। लेकिन फिल्म का म्यूजिक उतना दमदार नहीं है. अगर आप अनिल कपूर के फैन हैं तो फन्ने खां देख सकते है। 

अब बात करते हैं डायरेक्टर आकर्श खुराना की फिल्म कारवां की जिसमें इरफान खान एक बार फिर जबरदस्त एक्टिंग करते नजर आ रहे हैं फिल्म में साथउ एक्टर दुलकर सलमान और मिथिला लीड रोल में हैं फिल्म की कहानी एक सफर की है जिसके ड्राइवर इरफान खान है। ये एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जो आपको एक मैसेज भी देती है कॉमिक अंदाज में आपको सिस्टम की पोल खोलती नजर आती है अगर आप इरफान खान की एक्टिंग के कायल हैं और उन्हें देखना पसंद करते हैं तो ये फिल्म आपके लिए किसी रोड ट्रिप से कम नहीं है। 

 

अब बारी आती है मुल्क की डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म मुल्क एक सीरियस मूड की फिल्म है जिसमें तापासी पन्नू ऋषि कपूर, प्रतीक बब्बर और आशुतोष राणा लीड रोल में हैं...फिल्म की कहानी एक ऐसे मुस्लिम परिवार है जो बनारस में हिन्दुओं के बीच रहता है लोग उनकी इज्जत करते हैं मुराद अली (ऋषि कपूर ) की बड़ी बहु आरती (तापसी )हिन्दू है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब उनका भतीजा बम ब्लास्ट कर जिहाद के चक्कर में 16 लोगों को मार देता है। शाहिद तो मारा जाता है लेकिन पूरा परिवार उसकी गलती की सजा भुगतते है...पूरा समाज और मौहल्ले के लो पुलिस उन पर आतंक फैलाने का आरोप लगाते हैं मीडिया, पुलिस, कोर्ट और समाज के तानों से मुराद परेशान और अपने परिवार को बेगुनाह साबित करने में जुट जाते हैं....उनकी बड़ी बहू आरती वकील है जो अपने परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करती है...उनके सामने कोर्ट रूम में एंट्री लेते हैं आशुतोष राणा..जिन्हें देखकर आपको उनके नफरत होती...आरती और मुराद अली अपने परिवार कैसे बचाते हैं ये फिल्म में काफी दिलचस्प तरीके से दिखाया गया है...जिसको जानने के लिए आपको मुल्क देखनी चाहिए..फिल्म की कहानी काफी गंभीर है बेवजह कोई सीन खिंचा नहीं लगता सिस्टम और राजनीति के दलदल में फंसे परिवार की कहानी मुल्क आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।

फिल्म में ऋषि कपूर ने मुराद अली का रोल शानदार तरीके से निभाया ये किरदार उनके बेहतरीन रोल्स में गिना जाएगा...

वहीं वकील और बहू के रोल में तापसी पन्नू ने भी करिश्मा किया वैसे भी वो सीरियस रोल शिद्दत से निभाती हैं..उन पर ऐसे रोल शूट करते हैं...वहीं प्रतीक बब्बर का जिहादी अंदाज आपको हिलाकर रख देगा..फिल्म के सभी किरदारों ने शानदार एक्टिंग की है कहानी काफी इमोशनल है कैसे एक पूरा परिवार एक  इंसान की गलती के चलते आतंकवादी करार देदिया जाता है और समाज के लोगों के बीच वो बेवस और लाचार दिखाई देते हैं यानि कहा जाए तो हर मुस्लमान टेररिस्ट नहीं होता यही मुल्क की कहानी का आइना है और ये बताता है कि ये मुल्क सबका है तो सबको जीने का हक है। 

वेब डेस्क IBC24


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