News

जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 35 ए की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टली

Created at - August 6, 2018, 8:14 am
Modified at - August 6, 2018, 2:28 pm

जम्मू-कश्मीर। सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35-ए की वैधता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सोमवार को होने वाली सुनवाई दो हफ्ते के लिए टल गई है। सुनवाई से जुड़े बेंच के एक न्यायधीश के छुट्टी पर जाने के कारण इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते आगे बढ़ा दी गई, अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। दूसरे राज्यों के लोगों को संपत्ति खरीदने संबंधित संविधान के अनुच्छेद 35ए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई होने वाली थी। इसके विरोध में अलगाववादी संगठनों के आह्नवान पर घाटी में रविवार को पूरी तरह बंद रहा। आज भी अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया है। रविवार को कश्मीर के कई इलाकों में जमकर प्रदर्शन भी हुए। बंद को देखते हुए प्रशासन ने भारी सुरक्षाबल की तैनाती की है। प्रदर्शन के मद्देनजर दो दिनों के लिए अमरनाथ यात्रा रोकी गई है। 

पढ़ें-फ्रेंडशिप डे पर सोनाली ने दोस्तों को किया याद, सोशल मीडिया में शेयर की दोस्तों के साथ तस्वीरें

नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, माकपा, कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई समेत कई राजनीतिक दल और अलगाववादियों ने सुनवाई के खिलाफ बंद का समर्थन किया है। ये सुनवाई रुकवाना चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य प्रशासन ने राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए चल रही तैयारियों के मद्देनजर सुनवाई पर स्थगन की अपील की है।

पढ़ें- कल्पेश याग्निक सुसाइड केस में महिला पत्रकार सलोनी अरोड़ा को हिरासत में लिया गया

पीडीपी, नेकां व सीपीआई (एम) भी अनुच्छेद 35-ए को हटाने के पक्ष में नहीं है। इनका मानना है कि इससे राज्य के विशेष दर्जे को नुकसान पहुंचेगा। यहां की डेमोग्राफी में बदलाव होगा। पिछले कुछ दिनों से घाटी में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। 

आखिर क्या है अनुच्छेद 35ए? -

जम्मू कश्मीर सरकार उन लोगों को स्थाई निवासी मानती है जो 14 मई 1954 के पहले कश्मीर में बसे थे। ऐसे स्थाई निवासियों को जमीन खरीदने, रोजगार पाने और सरकारी योजनाओं में विशेष अधिकार मिले हैं। देश के किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थाई निवासी के तौर पर नहीं बस सकता। दूसरे राज्यों के निवासी ना कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं, ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है। अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं। उमर अब्दुल्ला की शादी भी राज्य से बाहर की महिला से हुई है, लेकिन उनके बच्चों को राज्य के सारे अधिकार हासिल हैं।उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला राज्य से बाहर के व्यक्ति से विवाह करने के बाद संपत्ति के अधिकार से वंचित कर दी गई हैं।

 

 

वेब डेस्क, IBC24


Download IBC24 Mobile Apps

Trending News

IBC24 SwarnaSharda Scholarship 2018

Related News