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बीसीसीआई को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने एक राज्य एक वोट में किया बदलाव

Created at - August 9, 2018, 3:23 pm
Modified at - August 9, 2018, 3:23 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के संविधान पर फैसला गुरुवार को सुनाया। इस फैसले से बीसीसीआई को राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने बीसीसीआई के संविधान के एक राज्य एक वोट सिस्टम में बदलाव किया है। अब कोर्ट ने बड़ौदा, सौराष्ट्र, सर्विसेज, रेलवे को भी सदस्य बनाया है। साथ ही, मुंबई, विदर्भ व महाराष्ट्र भी सदस्य रहेंगे। जबकि कूलिंग पीरियड तीन साल से बढ़ाकर दो कार्यकाल यानी 6 साल का कर दिया है। लेकिन 70 साल की उम्र का कैप और सरकारी अफसर व मंत्री वाली अयोग्यता बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान में बदलाव को लागू करने के लिए बीसीसीआई को 4 हफ्ते जा समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के मसौदा संविधान को अंतिम रूप दिए जाने संबंधी फैसला सुनाए जाने तक सभी राज्य क्रिकेट संघों के चुनाव कराने पर रोक लगा दी थी। अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने हाईकोर्ट से कहा कि राज्य क्रिकेट संघों के लिये प्रशासकों की नियुक्ति से जुड़ी किसी भी याचिका को विचारार्थ स्वीकार नहीं किया जाए।

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अदालत ने कहा कि वह एक राज्य, एक मतऔर बीसीसीआई पदाधिकारियों के लिये ब्रेक से संबंधित पूर्व फैसले में संशोधन पर विचार करेगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि 'लोढ़ा कमेटी के कूलिंग ऑफ की सिफारिश को हम नहीं मान रहे। हम BCCI के सुझाव को मानने को तैयार हैं।

वेब डेस्क, IBC24


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