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राम मंदिर निर्माण के लिए वीएचपी ने मोदी सरकार को दिया चार महीने का अल्टीमेटम

Created at - October 6, 2018, 11:11 am
Modified at - October 6, 2018, 11:11 am

 

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने तेवर कड़े कर लिए हैं। शुक्रवार को अहम बैठक में संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को चार महीने का अल्टीमेटम दिया है। संतो ने कहा कि 31 जनवरी तक सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो फिर 1 फरवरी को धर्म संसद में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

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दिल्ली में हुई संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में श्री राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में सरकार को सीधी चुनौती दी, जिसके मुताबिक संसदीय कानून बनाकर राम मंदिर के लिए रास्ता साफ किया जाय। और अगर जरूरत पड़े तो लोक सभा, राज्य सभा का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर कानून बनाएं और जन्म भूमि हिन्दुओं के हवाले करें। 

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इसके लिए विहिप ने कहा है कि वो 23 से 26 नवंबर तक कर्नाटक के उडुपी में धर्म संसद आयोजित करेगी, जिसमें देश भर से हजारों संतों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। बता दें कि एक हफ्ते पहले विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने भी केंद्र से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए नवंबर तक संसद में कानून पारित करने को कहा था।

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तोगड़िया ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार ऐसा करने में विफल रहती है तो नवंबर में उडुपी में होने वाली धर्म संसद के बाद साधु-संत दिल्ली की तरफ मार्च कर सकते हैं। प्रवीण तोगड़िया ने कहा था कि इस मुद्दे पर किसी के भी साथ अब और बातचीत नहीं की जाएगी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है और संसद से कानून पारित कराकर इसके निर्माण का रास्ता साफ होना चाहिए।

 

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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