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नादिया मुराद को शांति का नोबेल, कांटों भरा रहा ISIS की सेक्स स्लेव से नोबेल तक का सफर

Created at - October 6, 2018, 4:08 pm
Modified at - October 6, 2018, 4:09 pm

नई दिल्ली। आईएसआईएस के चंगुल से किसी तरह जान बचाकर भागी यजीदी महिला नादिया मुराद को साल 2018 का शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। नादिया एक यजीदी महिला है और इराक की रहने वाली हैं। आपको बता दें, साल 2014 में नादिया इस्लामिक स्टेट isis के आतंकियों ने अगवा कर लिया था। जिसके बाद उसके साथ बलात्कार किया और उसे सेक्स स्लेव बनाया गया था। 

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नादिया की उम्र 25 साल है। वह 3,000 यजीदी लड़कियों और महिलाओं में से एक है जिससे आईएस के आतंकियों ने बलात्कार और दुर्व्यवहार किया। वह करीब 3 महीने तक IS के आतंकियों के कब्जे में थी। जहां उसका दिन-रात बलात्कार किया गया। जब तक वह बेहोश नहीं हो जाती थी तब तक नादिया का बलात्कार किया जाता था। 

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वह कई बार खरीदी और बेची गई थी और जब वह IS की कैद में थी उस दौरान यौन और शारीरिक शोषण किया गया। उसका शरीर नोंचा गया। बता दें, नादिया मुराद को मलाला युसूफजई के बाद सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार  मिला है।  IS के चंगुल से निकलने के बाद वह महिलाओं में यौन हिंसा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं। साथ ही उन्होंने अपने अनुभवों पर एक किताब लिखी।

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नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रीस एंडरसन ने यहां नामों की घोषणा करते हुए कहा कि मुराद और कांगो के चिकित्सक डेनिस मुकवेगे को यौन हिंसा को युद्ध हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के इनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए संयुक्त रूप से चुना गया है।

 

वेब डेस्क, IBC24


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