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रेबीज वायरस का इलाज जरुरी ,जा सकती है जान भी

Created at - October 9, 2018, 6:20 pm
Modified at - October 9, 2018, 6:26 pm

रेबीज एक ऐसा वायरस है, जो जानवरों के काटने से फैलता है। यह एक जानलेवा रोग है क्योंकि इसके लक्षण बहुत देर में दिखने शुरू होते हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि रेबीज केवल कुत्तों के काटने से होता है लेकिन बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से भी  इस बीमारी के वायरस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा कई बार पालतू जानवर के चाटने या जानवर की लार का आदमी के खून से सीधे संपर्क होने से भी यह रोग हो सकता है। 

कैसे होता है ये रोग 

जब रेबीज वायरस सीधे व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं और उसके बाद व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाए। जब रेबीज वायरस मसल टिशूज में पहुंच जाते हैं, जहां वो व्यक्ति के इम्यून सिस्टम से बचकर अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं। इसके बाद ये वायरस न्यूरोमस्कुलर जंक्शन के द्वारा नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं।रेबीज वायरस जब व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं, तो ये दिमाग में सूजन पैदा कर देते हैं, जिससे जल्द ही व्यक्ति कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। इस रोग के कारण कई बार व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है कई बार उसे पानी से डर लगने लगता है। इसके अलावा कुछ लोगों को लकवा भी हो सकता है।

लक्षण

इसके लक्षण चार से आठ सप्ताह में विकसित होने लगते हैं। रेबीज के लक्षण कुछ इस प्रकार के होते हैं.

. बुखार

. सिरदर्द

. घबराहट या बेचैनी

. चिंता और व्याकुलता

. भ्रम की स्थिति

. खाना-पीना निगलने में कठिनाई

. बहुत अधिक लार निकलना

.पानी से डर लगना (हाईड्रोफोबिया)

. पागलपन के लक्षण

.अनिद्रा

एक अंग में पैरालिसिस यानी लकवा मार जान

इलाज

यदि जानवर काट लें तो तुरंत रोगी को टिटेनस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह से काटे गए जख्म का उचित इलाज करवाना चाहिए।

वेब डेस्क IBC24

 


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