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माफ करो, याद रखो और स्वस्थ हो जाओ...

Created at - May 24, 2015, 1:09 pm
Modified at - May 24, 2015, 1:09 pm

माफ कर देना केवल बड़प्पन का ही काम नहीं, इससे आपके मन को भी सुकून मिलता है। एक तरह से यह बिलकुल किसी चिकित्सीय थैरेपी की भांति प्रक्रिया होती है। तो बस एक बार आजमाइए 'फॉरगिवनेस थैरेपी' और महसूस कीजिए इसका कमाल।कई बार मनुष्य के जीवन में कुछ ऐसे वाकये होते हैं, जो दिमाग में गहरे बैठ जाते हैं और किसी व्यक्ति-विशेष के प्रति हमेशा उसके गुस्से की आग को भड़काए रखते हैं। ऐसे में व्यक्ति वाकये के याद आते ही चिड़चिड़ा हो जाता है, क्योंकि वह गुस्सा निकाल नहीं सकता। यहाँ तक कि किसी खुशी की बात पर भी वह उस बीती बात को याद कर दुःखी होने लगता है। असल में इसलिए कि आपके मन की पीड़ा मिटाना जरूरी है। यह आपके हित में है। ऐसा करने से आपका क्रोध नुकसानदायक नहीं रहेगा।इस विषय पर जॉन क्रिस्टॉफ अर्नोल्ड ने 'व्हाय फॉरगिव' नामक किताब लिखी है। जिसका तर्क है क्रोध या बदले की भावना को धो डालना। ऐसी समस्या का निराकरण यह है कि फॉरगिवनेस थैरेपी अपनाई जाए। आइए, जानते हैं यह थैरेपी क्यूं जरूरी है और कैसे कार्य करती है-


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