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आकर्षण बरकरार है अमरनाथ यात्रा का

Reported By: Pushpraj Sisodiya, Edited By: Pushpraj Sisodiya

Published on 24 May 2015 02:00 PM, Updated On 24 May 2015 02:00 PM

श्रीनगर। वर्ष 1993 की अमरनाथ यात्रा उन लोगों को अभी भी याद है जिन्होंने पहली बार इस यात्रा पर लगे प्रतिबंध के बाद ‘हरकतुल अंसार’ के हमलों को सहन किया था, तब 3 श्रद्धालुओं की जानें गई थीं। पहले हमले के 10 सालों बाद हुए भीषण हमले में 11 श्रद्धालु मौत की आगोश में चले गए थे। इन 10 सालों में कोई भी साल ऐसा नहीं बीता था, जब आतंकी हमलों और मौतों ने अमरनाथ यात्रा को चर्चा में न लाया हो लेकिन बावजूद इसके यह आज भी आकर्षण का ही केंद्र बनी हुई है।फिर से इसे सुरक्षित और असुरक्षित बनाने की कवायद तेज हुई है। राज्य की नई सरकार के लिए यह किसी चुनौती से कम इसलिए नहीं है, क्योंकि वर्ष 1993 के बाद के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि शायद ही कोई साल ऐसा होगा, जब आतंकी हमलों में श्रद्धालुओं की मौतें न हुई हों। और जो वर्ष बचा वह प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गया। अर्थात अगर आतंकवादियों के हाथों से बच गए तो कुदरत के हाथों से नहीं बच पाए। वर्ष 1992 तक यह अपनी सामान्य गति के साथ ही चलती रही है और इस गति की खास बात यह कही जा सकती है कि हिस्सा लेने वालों की संख्या भी इतनी नहीं होती थी कि यह अखबारों की सुर्खियों में स्थान पा सके। तब हिस्सा लेने वालों की संख्या बमुश्किल 54 हजार के आंकड़े को ही पार कर पाई थी। मगर 1993 के प्रथम आतंकी प्रतिबंध ने लोगों को इसकी ओर आकर्षित होने पर मजबूर कर दिया। नतीजा वर्ष 1993 से वर्ष 2002 की यात्रा में औसत भाग लेने वालों का आंकड़ा सवा लाख का रहा है। इनमें सुरक्षाकर्मियों तथा स्थानीय लोगों की गिनती नहीं की जाती है। फिर यूं अमरनाथ यात्रा पर प्रतिबंध और हमले बढ़ते रहे, इसमें शामिल होने वालों की संख्या भी बढ़ती गई। असल में कई धार् नतीजा सबके सामने ही था। 300 के करीब श्रद्धालु प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए और मौत की आगोश में चले गए। तब मृतकों में 9 माह के बच्चे और 100 साल के बूढ़े भी शामिल थे। तब आयु सीमा की कोई पाबंदी नहीं थी यात्रा में शामिल होने के लिए और न ही चिकित्सा प्रमाणपत्र की। हालांकि कहा तो यह भी जाता है कि मृतकों की संख्या हजार में थी, क्योंकि पंजीकरण की व्यवस्था नहीं होने से सही तौर पर मालूम ही नहीं हो पाया था कि मृतकों की संख्या सही मायने में कितनी है? लेकिन अमरनाथ यात्रा का एक रोचक तथ्य यह रहा कि यह आतंकवादी हमलों के कारण ही आकर्षण का केंद्र बनी थी, मगर आतंकवादी हमलों में मरने वालों की संख्या इतनी नहीं थी जितने प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 1993 से लेकर 2002 तक के अरसे के दौरान होने वाले हमलों में कुल 72 अमरनाथ श्रद्धालु विभिन्न हमलों में मारे गए। यह बात अलग है कि दिल की धड़कन रुकने या फिर घोड़े से फिसलकर मरने वालों की संख्या भी इन्हीं 10 सालों के दौरान उतनी ही थी जितनी आतंकी हमलों में मरने वालों की थी। बावजूद इसके कि आतंकी हमले मासूमों की जानें लेते रहे हैं, प्राकृतिक आपद
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