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Movie Review: वजीर

Created at - January 8, 2016, 8:42 pm
Modified at - January 8, 2016, 8:42 pm

दिमागी खेल चेस का रोमांच, दमदार अभिनय और घटनाओं का शतरंज की चालों से कहानी को अलग अंदाज में पेश करने वाले निदेशक बिजॉय नांबियार का यह फिल्म दर्शकों पर कुछ खास छाप छोड़ सकता है। महानायक अमिताभ की एक्टिंग दर्शकों को काफी पसंद आई। जिंदगी चेस के खेल जैसी नहीं होती, मगर कुछ-कुछ उसके जैसा हीं होता है। इस फिल्म में अभिजात जोशी और विधु विनोद चोपड़ा स्क्रिप्ट में अमिताभ और फरहान का अभिनय बहुत अच्छा है। फिल्म आपको शुरु से लेकर अंत तक जोड़े रखती है। इस फिल्म में अदिति राव हैदरी, जॉन अब्राहम और नील नितिन मुकेश भी हैं। हालांकि फिल्म अमिताभ और फरहान के अच्छे अभिनय के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। यह फिल्म एक बहादुर ATS (आतंकवादी निरोधक दस्ता) ऑफिसर दानिश अली की कहानी है। कहानी दानिश अली और रुहाना अली (अदिति राव हैदरी) की शादी से शुरु होती है। दानिश को दिल्ली में एक आतंकवादी दिखता है। उसका पीछा करते वो आतंकियों के काफी नजदीक पहुंच जाता है। वहां आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग दानिश की बेटी की मौत हो जाती है। इसके बाद रूहाना अपनी बेटी की मौत का जिम्मेदार दानिश को मानती है। अकेला दानिश कब्रिस्तान में आत्महत्या का प्रयास करता है। पंडित ओमकार नाथ धर उन्हें बचा लेता है।कुछ समय के बाद दानिश की मुलाकात होती है एक अपाहिज बूढ़े व्यक्ति 'पंडितजी' यानी अमिताभ बच्चन से होती है। पंडितजी तो खुद अपने साथ हुई घटना का बदला लेना चाहते हैं।


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