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अमेरिका ने एच-1बी, एल-1 वीजा पर बढ़ाया शुल्क

Last Modified - January 14, 2016, 3:33 pm

वाशिंगटन। अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों में लोकप्रिय एच-1बी और एल-1 वीजा के लिए अतिरिक्त शुल्क 4,500 डॉलर तक बढ़ाये जाने को अधिसूचित कर दिया है। यूएस सिटजिनशिप एड इमीग्रेशन सर्विस (यूएससीआईएस) ने बताया कि एच-1बी वीजा की कुछ निश्चित श्रेणियों के लिए आवेदन करने वालों को 4,000 डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इस कानून पर राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 18 दिसंबर, 2015 को हस्ताक्षर किया।वहीं एल-1ए तथा एल-1बी के लिए आवेदन करने वालों को 4,500 डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इस शुल्क कों बढ़ाये जाना भारतीय आईटी सेक्टर की कंपनियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह शुल्क मूल प्रसंस्करण शुल्क, धोखाधड़ी निरोधक एवं खोज शुल्क, अमेरिकी प्रतिस्पर्धा और 1998 के कार्यबल सुधार कानून के साथ प्रीमियम प्रसंस्करण शुल्क के अलावा है। यूएससीआईएस के मुताबिक यह शुल्क 30 सितंबर 2015 तक प्रभावी रहेगा।पिछले वर्ष सितंबर में जारी एक अध्ययन में भारतीय आईटी कंपनियों के संगठन नासकॉम ने कहा था कि भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका को करीब 7 से 8 करोड़ डॉलर वर्षिक भुगतान करती है। नए शुल्क के अनुसार यह बढ़कर सालाना 1.4 अरब डॉलर से 1.6 अरब डॉलर के बीच हो जाएगा। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुददे को राष्ट्रपति ओबामा के सामने रखा था जब उन्होंने पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर 12 दिसंबर को हुए ऐतिहासिक समझौते को लेकर बधाई देने के लिये फोन किया था।

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