पटना विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक व्हीलर सीनेट हाउस 100 वर्ष का हुआ, बिना समारोह गुजरा दिन
पटना विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक व्हीलर सीनेट हाउस 100 वर्ष का हुआ, बिना समारोह गुजरा दिन
पटना, 20 मार्च (भाषा) बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक व्हीलर सीनेट हाउस शुक्रवार को 100 वर्ष का हो गया। विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोहों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों का पारंपरिक स्थल रहा यह भवन अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया, लेकिन इस अवसर पर कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।
विश्वविद्यालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अवकाश होने के कारण इस महत्वपूर्ण दिन पर कोई आयोजन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह भवन न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे शहर के लिए गौरव का प्रतीक है।
डोरिक स्तंभों से सुसज्जित इस भव्य भवन का उद्घाटन 20 मार्च 1926 को तत्कालीन बिहार एवं उड़ीसा प्रांत के गवर्नर सर हेनरी व्हीलर ने किया था। भवन का निर्माण मुंगेर के राजा देवकी नंदन प्रसाद सिंह के अनुदान से हुआ था, जबकि इसकी आधारशिला 16 मार्च 1925 को रखी गई थी।
यह भवन अपने उद्घाटन के बाद से कई ऐतिहासिक आयोजनों का केंद्र रहा है। यहां विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोहों के अलावा 1933 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन सत्र, अखिल भारतीय ओरिएंटल सम्मेलन और विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के पुस्तकालय सम्मेलन आयोजित किए गए।
इस स्थल की ऐतिहासिक पहचान 17 मार्च 1936 को नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के नागरिक अभिनंदन से भी जुड़ी है, जो उनके उत्तर भारत दौरे के दौरान यहां हुआ था।
अशोक राजपथ के समीप स्थित यह भवन विश्वविद्यालय परिसर का अभिन्न हिस्सा है, जहां 1917 में स्थापना के बाद विश्वविद्यालय ने अपना स्थायी रूप लिया। विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि इस भवन में एक गुप्त मार्ग भी मौजूद है, जो सीनेट हॉल से कुलपति कार्यालय तक जाता है, हालांकि इसका उपयोग अब लंबे समय से नहीं हुआ है।
हाल के वर्षों में भवन को लेकर विवाद भी सामने आए हैं। वर्ष 2023 में इसका नाम बदलकर ‘जयप्रकाश नारायण अनुशद भवन’ कर दिया गया, जिसका कुछ धरोहर प्रेमियों और पूर्व छात्रों ने विरोध किया। उनका कहना है कि यह कदम ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित करता है।
इस बीच, भवन के जीर्णोद्धार के लिए पूर्व में 2.84 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वहीं, अशोक राजपथ पर बने डबल डेकर फ्लाईओवर के कारण अब इस ऐतिहासिक इमारत का दृश्य आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है।
गौरतलब है कि पांच सितंबर 2023 को बिहार के तत्कालीन राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके जीर्णोद्धार के बाद पुनः उद्घाटन की स्मृति में पट्टिका का अनावरण किया था। उस अवसर पर भवन का नाम बदलने का सुझाव भी दिया गया था।
भाषा
कैलाश रवि कांत

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