प्रधानमंत्री बिहार के मधुबनी में सकरी और रैयाम में दो चीनी मिलों का करेंगे शिलान्यास : मंत्री
प्रधानमंत्री बिहार के मधुबनी में सकरी और रैयाम में दो चीनी मिलों का करेंगे शिलान्यास : मंत्री
पटना, 29 जुलाई (भाषा) बिहार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस वर्ष 20 नवंबर को राज्य के मधुबनी जिले के सकरी और रैयाम में दो नयी चीनी मिलों की आधारशिला रखेंगे।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) के सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने बिहार में 25 नयी चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री 20 नवंबर, 2026 को सकरी और रैयाम की दो चीनी मिलों का शिलान्यास करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चीनी मिलों की स्थापना के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गन्ना किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, गन्ना आयुक्त अनिल कुमार झा और संयुक्त गन्ना आयुक्त वेदव्रत की मौजूदगी में मंत्री ने बताया कि सकरी और रैयाम की दोनों चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग करेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में अधिक से अधिक चीनी मिलें स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है और कई निवेशक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘अगले पांच वर्षों में राज्य में 25 नयी चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन मिलों में उत्पादन शुरू होने में एक से दो वर्ष का समय लगेगा।’’
उन्होंने बताया कि पेराई सत्र 2025-26 के दौरान चीनी मिलों ने गन्ना किसानों के 2,137.83 करोड़ रुपये के बकाये का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है।
सासामुसा और मोतीपुर चीनी मिल के बारे में मंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने सासामुसा क्षेत्र के गन्ना किसानों के पिछले पेराई सत्रों के 43 करोड़ रुपये के मूल बकाये के भुगतान को पहले ही मंजूरी दे दी है, जिससे गोपालगंज स्थित सासामुसा चीनी मिल के पुनर्जीवन और दोबारा संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा तथा निवेशकों को इसके पुनर्स्थापन के लिए आकर्षित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने मुजफ्फरपुर स्थित बंद मोतीपुर चीनी मिल की 266 एकड़ भूमि का कब्जा इंडियन पोटाश लिमिटेड से लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। मंत्री ने कहा कि इस भूमि पर नयी चीनी मिल, गन्ना अनुसंधान केंद्र और अन्य औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने ‘‘बिहार चीनी उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026’’ को मंजूरी दी है, जिसके तहत एकीकृत चीनी परिसर स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इनमें नयी चीनी मिलों के साथ डिस्टिलरी, को-जनरेशन बिजली संयंत्र और संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) इकाइयां भी होंगी।
मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से चीनी, एथेनॉल, बिजली और बायोगैस के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, पूंजी निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा।
मरहौरा चीनी मिल को चालू किए जाने संबंधी एक प्रश्न पर विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला फिलहाल राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में लंबित है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले का शीघ्र समाधान कराने का प्रयास कर रही है ताकि मिल को जल्द से जल्द चालू कराया जा सके।
सिंह ने कहा कि यदि मरहौरा के निकट 50 से 100 एकड़ भूमि उपलब्ध हो जाए तो वहां नयी चीनी मिल स्थापित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार गन्ने की उत्पादकता, रकबे और चीनी रिकवरी दर बढ़ाने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में चीनी रिकवरी दर 10.3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
उन्होंने कहा कि गन्ना खेती के विस्तार और प्रोत्साहन के लिए सरकार ने बीज विकास योजना, गन्ना यंत्रीकरण योजना, गन्ना नर्सरी योजना और गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं।
सिंह ने बताया कि विभाग अब उन जिलों में भी गन्ना किसानों का सर्वेक्षण करा रहा है, जहां पहले गन्ने की खेती नहीं होती थी।
राज्य में नयी चीनी मिलों की स्थापना और गन्ना उत्पादन के समग्र विकास के उद्देश्य से बिहार सरकार ने देश के तीन प्रमुख संस्थानों कोयंबटूर स्थित शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट (एसबीआई), पुणे स्थित वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), पटना के साथ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए थे। इन समझौतों का उद्देश्य राज्य की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप गन्ने की उन्नत बीज किस्मों के उत्पादन तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना है।
भाषा कैलाश
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