रसोई गैस की कीमत में प्रति सिलिंडर 15 रुपये की वृद्धि; पेट्रोल, डीजल की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर

रसोई गैस की कीमत में प्रति सिलिंडर 15 रुपये की वृद्धि; पेट्रोल, डीजल की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर

Edited By: , October 6, 2021 / 03:00 PM IST

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेजी के मद्देनजर बुधवार को रसोई गैस एलपीजी की कीमत में 15 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गयी जबकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गयीं।

सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी की कीमतें बढ़ायी गयी हैं। इसके साथ 14.2 किलोग्राम के सिलिंडर की कीमत में जुलाई से अब तक कुल 90 रुपये बढ़ाए गए हैं।

सरकारी खुदरा ईंधन विक्रेता कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार दिल्ली और मुंबई में अब रसोई गैस की कीमत 899.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गयी है। वहीं कोलकाता में यह 926 रुपये है।

सरकार ने समय-समय पर वृद्धि करके ज्यादातर शहरों में एलपीजी पर सब्सिडी को समाप्त कर दिया है। आम परिवार, जो एक वर्ष में रियायती दरों पर 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडर का हकदार है, और मुफ्त कनेक्शन पाने वाले उज्ज्वला योजना लाभार्थी, अब बाजार मूल्य का भुगतान करते हैं।

पांच किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 502 रुपये हो गयी है।

जुलाई के बाद से रसोई गैस की कीमतों में यह चौथी वृद्धि है। जुलाई में कीमतों में 25.50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गयी थी। इसके बाद 17 अगस्त और एक सितंबर को 25-25 रुपये की बढ़ोतरी की गयी।

साथ ही पेट्रोल की कीमत में 30 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 35 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गयी।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 102.94 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 91.42 रुपये प्रति लीटर है। इसी तरह मुंबई में यह क्रमश: 108.96 और 99.17 है।

स्थानीय करों के आधार पर कीमतें राज्यों में अलग-अलग होती हैं।

सरकारी खुदरा ईंधन विक्रेताओं ने पिछले कुछ दिनों में घरेलू दरों और लागत के बीच तालमेल रखने करने के लिए मामूली वृद्धि का सहारा लिया है। लेकिन ओपेक प्लस (तेल उत्पादक देशों) द्वारा उत्पादन में वृद्धि को प्रति दिन चार लाख बैरल पर सीमित करने से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 82.92 डॉलर प्रति बैरल हो गयी है जिसकी वजह से ईंधन की कीमतों में बड़े अनुपात में वृद्धि की जा रही है।

सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में सुधार की उम्मीद में तेल कंपनियों ने बढ़ोतरी को मामूली स्तर तक रखा था।

एक सूत्र ने कहा, ‘तेल विपणन कंपनियों ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में मामूली वृद्धि की है। हालांकि, कीमत में सुधार नहीं होने की स्थिति में, काफी मूल्य वृद्धि की जा सकती है।’

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को ईंधन की ऊंची कीमतों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

राष्ट्रीय राजधानी में अपने मंत्रालय के एक कार्यक्रम के दौरान ईंधन की कीमतों के बारे में पूछे जाने पर, पुरी ने कहा, ‘छोड़ो’ और इसके बाद वहां से चले गए।

लगभग तीन हफ्ते के ठहराव के बाद ईंधन की कीमतों में सातवीं बार की गयी वृद्धि के साथ देश के ज्यादातर बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार चली गयी है।

इसी तरह, कीमतों में 10वीं बार वृद्धि के साथ मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में डीजल की कीमत भी 100 रुपये प्रति लीटर के पार चली गयी है।

बाजार में ऊर्जा की कमी के बावजूद, ओपेक प्लस द्वारा आपूर्ति की अपनी योजनाबद्ध क्रमिक वृद्धि को बनाए रखने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें लगभग सात साल के उच्च स्तर पर पहुंच गयीं।

वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट की कीमत बढ़कर 82.92 डॉलर प्रति बैरल हो गयी।

तेल का शुद्ध आयातक होने के नाते, भारत पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार रखता है।

एक महीने पहले ब्रेंट की कीमत लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल थी।

सऊदी अरब द्वारा बेची जाने वाली रसोई गैस की कीमत में काफी तेजी आयी है। यह मई के 483 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अक्तूबर में 797 डॉलर प्रति टन हो गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने क्रमश: 24 सितंबर और 28 सितंबर से डीजल एवं पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने का सिलसिला फिर से शुरू कर दिया जिसके साथ ही उससे पिछले कुछ समय से मूल्य वृद्धि पर लगी रोक समाप्त हो गयी।

तब से डीजल की कीमत में 2.80 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल में 1.75 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।

ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि की विपक्षी दलों ने आलोचना की है और मांग की है कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए दोनों ईंधनों पर लगाए जा रहे रिकॉर्ड उत्पाद शुल्क में कटौती करे।

सरकार ने अब तक इस मांग की अनदेखी की है।

भाषा

प्रणव शाहिद

शाहिद