पैक्स के कंप्यूटरीकरण का मंत्रिमंडल का निर्णय सहकारिता क्षेत्र के लिये वरदान : अमित शाह |

पैक्स के कंप्यूटरीकरण का मंत्रिमंडल का निर्णय सहकारिता क्षेत्र के लिये वरदान : अमित शाह

पैक्स के कंप्यूटरीकरण का मंत्रिमंडल का निर्णय सहकारिता क्षेत्र के लिये वरदान : अमित शाह

: , June 29, 2022 / 06:20 PM IST

नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सहकारिता से जुड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है और केंद्रीय मंत्रिमंडल का 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्‍यूटरीकरण करने का फैसला इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण के लिए 2,516 करोड़ रुपये के खर्च की बुधवार को मंजूरी दी है।

शाह ने बयान में कहा कि सहकारिता मंत्रालय का गठन हो या उसके बाद इस क्षेत्र को सशक्त करने की दिशा में लिए गये सभी निर्णय, इनसे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘सहकार से समृद्धि’ मात्र एक वाक्य नहीं है बल्कि यह सहकारिता से जुड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अटूट संकल्प है।

उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में आज मंत्रिमंडल ने लगभग 63,000 पैक्स का कंप्‍यूटरीकरण करने का अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके लिये मैं उनका आभार प्रकट करता हूं ।

उन्होंने कहा, ‘‘ पैक्स सहकारिता क्षेत्र की सबसे छोटी इकाई है और इसका कंप्‍यूटरीकरण क्षेत्र के लिए वरदान सिद्ध होगा।’’

शाह ने कहा कि 2,516 करोड़ रुपये की लागत से 63,000 पैक्स का कंप्‍यूटरीकरण किया जायेगा, जिससे लगभग 13 करोड़ छोटे व सीमांत किसान लाभांवित होंगे।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस डिजिटल युग में पैक्स के कंप्‍यूटरीकरण का निर्णय इनकी पारदर्शिता, विश्वसनीयता व कार्यक्षमता को बढ़ाएगा व बहुउद्देश्यीय पैक्स की ‘अकाउंटिंग’ में भी सुविधा होगी। लोगों की सुविधा के लिए सॉफ्टवेयर स्थानीय भाषाओं में भी उपलब्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि इससे पैक्स को विभिन्न सेवाएं जैसे प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी), फसल बीमा योजना व खाद, बीज आदि लागत प्रदान करने के लिए एक नोडल केंद्र बनने में भी मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि इस कंप्यूटरीकरण कार्यक्रम का उद्देश्य पैक्स की दक्षता बढ़ाने के साथ उनके संचालन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाना है। इसके तहत पैक्स को अपने व्यवसाय में विविधता लाने तथा विभिन्न गतिविधियां/सेवाएं शुरू करने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

पांच साल की अवधि में लगभग 63,000 कार्यरत पैक्स के कंप्यूटरीकरण का प्रस्ताव है।

सरकारी बयान के अनुसार, देश में अधिकांश पैक्स को अबतक कंप्यूटरीकृत नहीं किया गया है और वे अभी भी हस्तचालित तरीके से कार्य कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप उनके संचालन में क्षमता और भरोसे की कमी दिखाई देती है।

कुछ राज्यों में पैक्स का कहीं-कहीं और आंशिक आधार पर कंप्यूटरीकरण किया गया है। उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर में कोई समानता नहीं है और वे राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के साथ जुड़े हुए नहीं हैं।

बयान के अनुसार, पूरे देश में सभी पैक्स को कंप्यूटरीकृत करने और उनके रोजमर्रा के कार्य-व्यवहार के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच पर लाने तथा एक सामान्य लेखा प्रणाली (सीएएस) के तहत रखने का प्रस्ताव किया गया है।

देश में सभी संस्थाओं की तरफ से दिए गए केसीसी ऋणों में पैक्स का हिस्सा 41 प्रतिशत (3.01 करोड़ किसान) है। पैक्स के माध्यम से इन केसीसी ऋणों में से 95 प्रतिशत (2.95 करोड़ किसान) छोटे व सीमांत किसानों को दिए गए हैं।

भाषा दीपक दीपक अजय

अजय

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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