डिश टीवीः उच्चतम न्यायालय ने यस बैंक की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय को लौटाई |

डिश टीवीः उच्चतम न्यायालय ने यस बैंक की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय को लौटाई

डिश टीवीः उच्चतम न्यायालय ने यस बैंक की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय को लौटाई

: , January 24, 2023 / 09:17 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने डिश टीवी शेयर हस्तांतरण मामले में एस्सेल समूह की तरफ से दायर प्राथमिकी में पुलिस जांच को चुनौती देने वाली यस बैंक की याचिका ठुकराने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को मंगलवार को निरस्त कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की एक पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने यह भी कहा कि पुलिस जांच पर रोक लगाने वाला 30 नवंबर, 2021 का उसका पिछला आदेश उस समय तक लागू रहेगा जब तक उच्च न्यायालय प्राथमिकी के खिलाफ दायर यस बैंक की अर्जी का निपटारा नहीं कर देता है।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को उच्च न्यायालय को लौटाते हुए दो महीने के भीतर नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘हमारा मत है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय यस बैंक की याचिका का निपटान करते समय न्यायसंगत नहीं था।… उच्च न्यायालय को याचिका के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा करने में वह नाकाम रहा है।’

न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त किया जा रहा है और उसे याचिका पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने के लिए भेजा जा रहा है। हालांकि उसने साफ किया कि वह विरोधी पक्षों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं व्यक्त कर रहा है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 25 नवंबर, 2021 को यस बैंक की याचिका को ठुकरा दिया था जिसमें पुलिस की तरफ प्राथमिकी दर्ज कर की जा रही जांच को निरस्त करने की मांग की गई थी। यह प्राथमिकी डिश टीवी का संचालन करने एस्सेल समूह की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

इस पर यस बैंक ने कहा कि उसने एस्सेल समूह एवं उसकी सहयोगी इकाइयों को 2016-18 के दौरान 5,270 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। इस कर्ज के लिए बैंक के पास समूह ने 44.5 करोड़ शेयरों को गिरवी रखा था।

तय समय पर भुगतान नहीं होने पर बैंक ने इन गिरवी शेयरों को भुना लिया और वह डिश टीवी का सबसे बड़ा शेयरधारक बन गया। बैंक ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे डिश टीवी की सालाना आमसभा में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस जांच के नोटिस भेजे गए।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण

 

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