शीत भंडारण सुविधाओं से हिमाचल के किसानों को मिल रहा है तीन गुना प्रतिफल

शीत भंडारण सुविधाओं से हिमाचल के किसानों को मिल रहा है तीन गुना प्रतिफल

शीत भंडारण सुविधाओं से हिमाचल के किसानों को मिल रहा है तीन गुना प्रतिफल
Modified Date: July 3, 2026 / 07:57 pm IST
Published Date: July 3, 2026 7:57 pm IST

हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश), तीन जुलाई (भाषा) शीत भंडारण सुविधा हिमाचल के हमीरपुर ज़िले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। किसान अब मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने के बजाय, ज्यादा मांग वाले समय में अपनी उपज बेचकर फसल कटाई के तुरंत बाद मिलने वाले दाम से तीन से चार गुना ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

हमीरपुर ज़िले में, एचपीशिवा परियोजना के तहत अलग-अलग फलों के बागान विकसित करने के साथ-साथ, उपज के लिए शीत भंडारण सुविधाओं के निर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

बागवानी विभाग के उप-निदेशक, राजेश्वर परमार ने शुक्रवार को बताया कि विभाग एकीकृत बागवानी मिशन के तहत शीत भंडारण सुविधाओं के निर्माण के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रहा है।

हमीरपुर के कधरियाना गांव के सुरेश पटियाल, जिन्हें बागवानी विभाग ने शीत भंडारण सुविधा खोलने के लिए प्रोत्साहित किया था, ने कहा कि शीत भंडारण सुविधाएं न केवल उपज को खराब होने से बचाती हैं, बल्कि ग्राहकों की मांग के अनुसार सही समय पर बाजार में फसल बेचकर बेहतर दाम पाने में भी मदद करती हैं।

सुरेश पटियाल ने बताया कि एचपीशिवा प्रोजेक्ट क्लस्टर के तहत पास के गांव कैहद्रू में बागवानों द्वारा उगाए गई मोसंबी बाजार में 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रही थी।

जैसे ही उनकी शीत भंडारण सुविधा चालू हुई, उन्होंने उनकी 15 टन उपज को स्टोर किया और लगभग दो महीने बाद, वही मोसंबी बाजार में 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकी।

हमीरपुर ज़िले में एचपीशिवा (हिमाचल प्रदेश सब-ट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, इरिगेशन एंड वैल्यू एडिशन) परियोजना के तहत मोसंबी, अमरूद, अनार और फलों की अन्य फसलों के लिए क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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