सोना 1,800 रुपये टूटा, चांदी 6,500 रुपये फिसली

सोना 1,800 रुपये टूटा, चांदी 6,500 रुपये फिसली

सोना 1,800 रुपये टूटा, चांदी 6,500 रुपये फिसली
Modified Date: April 28, 2026 / 08:27 pm IST
Published Date: April 28, 2026 8:27 pm IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमत 1,800 रुपये टूटकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि चांदी 6,500 रुपये लुढ़ककर 2.44 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गयी।

कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी और मजबूत डॉलर के कारण वैश्विक सर्राफा बाजार पर असर पड़ा है।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,800 रुपये यानी 1.15 प्रतिशत टूटकर 1,54,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर रहा। सोमवार को सोना 1,56,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत भी 6,500 रुपये यानी लगभग तीन प्रतिशत टूटकर 2,44,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गईं। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,50,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘मंगलवार को सोना तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया, क्योंकि बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा दिया और लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों की आशंका को मजबूत किया।’’

उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में वृद्धि की आशंका के कारण अधिक सख्त नीतिगत रुख की संभावना है। इससे बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप, यह स्थिति कीमतों पर अतिरिक्त गिरावट का दबाव डालती है।

गांधी ने कहा कि कारोबारी अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत प्रमुख केंद्रीय बैंकों के निर्णयों से पहले अपने सौदों को कम कर रहे हैं। इससे कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 95.37 डॉलर यानी 2.04 प्रतिशत टूटकर 4,586.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 2.33 डॉलर यानी 3.09 प्रतिशत फिसलकर 73.18 डॉलर प्रति औंस पर रही।

मिराए एसेट शेयरखान में जिंस मामलों के प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि हाजिर सोना एक प्रतिशत से ज्यादा टूटकर लगभग 4,580 डॉलर प्रति औंस पर रहा। इसकी वजह यह थी कि कच्चातेल और डॉलर में बढ़त जारी रही, क्योंकि ऐसी खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ताजा प्रस्ताव से नाखुश हैं। इस प्रस्ताव में कथित तौर पर परमाणु वार्ता को टालने की बात शामिल थी।

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, महंगाई को लेकर चिंताएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों का कम होना डॉलर को मजबूती दे रहा है और कीमती धातुओं पर दबाव डाल रहा है।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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