वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने, चांदी की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी: आर्थिक समीक्षा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने, चांदी की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी: आर्थिक समीक्षा
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है। संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा में यह अनुमान लगाया गया है।
समीक्षा में बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान सोने और चांदी दोनों ने अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छुआ, जो बढ़ी हुई वैश्विक अनिश्चितता और मजबूत सुरक्षित निवेश की मांग को दर्शाता है।
यह तेजी कमजोर अमेरिकी डॉलर, लगातार नकारात्मक वास्तविक दरों की उम्मीदों और भू-राजनीतिक और वित्तीय जोखिमों के बारे में बाजार के बढ़ते आकलन से प्रेरित थी।
संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, ‘‘वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में उनकी लगातार मांग के कारण कीमती धातुओं, सोने और चांदी दोनों की कीमतों में वृद्धि जारी रहने की संभावना है, जब तक कि स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती और व्यापार युद्ध हल नहीं हो जाते।’’
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में, चांदी वायदा बृहस्पतिवार को 6.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गया, जबकि सोने ने 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का नया सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ।
इसमें कहा गया है कि कुछ टिप्पणीकारों का मानना है कि वर्ष 2025 में सोने और चांदी द्वारा तय की गई ऊंचाई शायद बनी नहीं रह पाएगी।
इस बीच, एमसीएक्स में 31 दिसंबर, 2025 को दर्ज आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतें 1,39,201 रुपये प्रति 10 ग्राम पर समाप्त हुईं, जबकि चांदी 2,35,701 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
खुदरा बाजारों में, पिछले साल के अंत में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतें क्रमशः 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम और 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कम रहीं।
वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत की आयात संरचना में पेट्रोलियम कच्चा तेल, सोना और पेट्रोलियम उत्पादों का दबदबा बना रहा, इन क्षेत्रों का, कुल आयात में एक तिहाई से अधिक हिस्सा रहा। सोने का आयात सालाना आधार पर 27.4 प्रतिशत बढ़ा।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि सोने के आयात में वृद्धि का श्रेय सोने की कीमतों में वृद्धि को दिया जा सकता है, जो 38.2 प्रतिशत (सालाना आधार पर) बढ़ी और मजबूत घरेलू खपत से प्रेरित थी।
इस बीच, विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए), जो मुद्रा भंडार का अहम पहलू हैं, मार्च, 2025 के आखिर में 567.6 अरब डॉलर से थोड़ा घटकर 16 जनवरी, 2026 को 560.5 अरब डॉलर रह गईं।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, इसके उलट, सोने का हिस्सा 16 जनवरी, 2026 तक तेज़ी से बढ़कर 117.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि मार्च, 2025 के आखिर में यह 78.2 अरब डॉलर था।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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