यात्री किराये में बढ़ोतरी से माल ढुलाई पर रेलवे की निर्भरता कम हुई: आर्थिक समीक्षा

यात्री किराये में बढ़ोतरी से माल ढुलाई पर रेलवे की निर्भरता कम हुई: आर्थिक समीक्षा

यात्री किराये में बढ़ोतरी से माल ढुलाई पर रेलवे की निर्भरता कम हुई: आर्थिक समीक्षा
Modified Date: January 29, 2026 / 05:53 pm IST
Published Date: January 29, 2026 5:53 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) संसद में बृहस्पतिवार को पेश वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार रेल मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में तीन बार यात्री किराये को ‘तर्कसंगत’ बनाया है। इसके चलते रेलवे की कुल आय में माल ढुलाई से होने वाली कमाई की हिस्सेदारी धीरे-धीरे 68 प्रतिशत से घटकर 65 प्रतिशत हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके और गिरकर 62 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

समीक्षा ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान रेलवे के आर्थिक प्रदर्शन का विश्लेषण किया और आगामी वर्ष के लिए अपना नजरिया प्रस्तुत किया। इसमें मुख्य रूप से रेलवे यातायात में ‘क्रॉस-सब्सिडी’ पर ध्यान केंद्रित किया गया। क्रॉस-सब्सिडी के तहत रेलवे माल ढुलाई सेवाओं से मुनाफा कमाता है, लेकिन उस मुनाफे का इस्तेमाल यात्री और अन्य सेवाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए करता है।

समीक्षा में कहा गया, ‘‘पिछले पांच वर्षों में यात्री किराये को तीन बार तर्कसंगत बनाया गया – एक जनवरी, 2020, एक जुलाई, 2025 और 26 दिसंबर, 2025 को। नतीजतन, रेलवे की कुल आय में माल ढुलाई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022-23 के 68 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 65 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इसके 62 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”

वित्त वर्ष 2022-23 का हवाला देते हुए समीक्षा में बताया गया कि रेलवे की कुल कमाई में माल ढुलाई का हिस्सा लगभग 68 प्रतिशत था। हालांकि, माल ढुलाई से होने वाले मुनाफे का उपयोग यात्री सेवाओं के घाटे को पाटने के लिए किया गया। इसके बावजूद, यात्री परिचालन से 5,257 करोड़ रुपये का ऐसा घाटा रह गया जिसकी भरपाई नहीं हो सकी।

समीक्षा के अनुसार, ‘‘नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने यात्री परिचालन की लागत का गहन विश्लेषण करने, इसके नुकसान को कम करने के लिए कदम उठाने और माल ढुलाई से कमाई बढ़ाने के लिए माल की श्रेणियों में विविधता लाने की सिफारिश की है।’’

आर्थिक समीक्षा में तर्क दिया गया कि ‘क्रॉस-सब्सिडी’ के कारण माल ढुलाई की दरें ऊंची रहती हैं, जो सड़क परिवहन के साथ प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हैं। इससे वस्तुओं की कीमतें, उपभोक्ता मूल्य और लॉजिस्टिक लागत बढ़ जाती है। माल ढुलाई दरों को तर्कसंगत बनाने से राजस्व में सुधार होगा और माल को सड़क के बजाय रेल मार्ग से भेजने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, परिवहन क्षेत्र पर्यावरण के अनुकूल बनेगा और सड़कों पर भीड़ कम होगी। समीक्षा के मुताबिक, रेल माल ढुलाई सेवा सड़क परिवहन की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक लागत प्रभावी है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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