भारत-यूरोपीय संघ ने किया ‘सबसे बड़ा समझौता’, वैश्विक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

भारत-यूरोपीय संघ ने किया ‘सबसे बड़ा समझौता’, वैश्विक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

भारत-यूरोपीय संघ ने किया ‘सबसे बड़ा समझौता’, वैश्विक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
Modified Date: January 27, 2026 / 06:14 pm IST
Published Date: January 27, 2026 6:14 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए जिसे ‘अबतक का सबसे बड़ा समझौता’ बताया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने व्यापार एवं रक्षा क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करने के लिए एक व्यापक एजेंडा पेश किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय संघ के नेताओं उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी की। इसके बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा व रक्षा सहयोग और यूरोप में भारतीय प्रतिभाओं की आवाजाही से जुड़े दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत और 27 देशों के समूह ने अगले पांच वर्षों के लिए एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा पेश किया। मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता के समापन सहित कुल 13 समझौतों को अंतिम रूप दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था ‘भारी उथल-पुथल’ का सामना कर रही है और ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में स्थिरता को मजबूत करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ आज भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है।’’

मोदी ने बयान में कहा, ‘‘ इससे हमारे किसानों तथा लघु उद्योगों को यूरोपीय बाजार तक पहुंच सुगम होगी और विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ यह मुक्त व्यापार समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश को बढ़ावा देगा, नए नवाचार साझेदारियों का निर्माण करेगा और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। इसका मतलब यह है कि यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि के लिए एक नया खाका है।’’

व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू होने के बाद से 18 साल लग गए। समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने में कम से कम छह महीने लग सकते हैं क्योंकि दोनों पक्षों द्वारा इसकी कानूनी जांच-पड़ताल आवश्यक होगी।

यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई।

व्यापार समझौते की सराहना करते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी यह सशक्त संदेश देगी कि वैश्विक चुनौतियों का सबसे अच्छा समाधान सहयोग है। ये टिप्पणियां यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने कर दिखाया। हमने अब तक का सबसे बड़ा समझौता कर दिखाया। हम दो अरब लोगों का बाजार बना रहे हैं।’’

लेयेन ने कहा, ‘‘ यह दो दिग्गजों की कहानी है…। दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की। दो दिग्गज जिन्होंने वास्तव में पारस्परिक लाभ के दृष्टिकोण से साझेदारी को चुना। एक सशक्त संदेश कि वैश्विक चुनौतियों का सबसे अच्छा समाधान सहयोग ही है।’’

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते से यूरोपीय निर्यातकों के लिए वार्षिक शुल्क में चार अरब यूरो तक की कटौती होगी और भारत और यूरोप दोनों में लाखों श्रमिकों के लिए रोजगार सृजित होंगे।

यूरोपीय संघ एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसमें निर्यात करीब 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था।

वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘‘ यह (मुक्त व्यापार समझौता) भारत के कौशल, सेवाओं एवं विशाल क्षमता को यूरोप की प्रौद्योगिकी, पूंजी तथा नवाचार के साथ जोड़ता है। ’’

उन्होंने अमेरिकी प्रशासन की व्यापार और शुल्क नीतियों का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इससे विकास के ऐसे स्तर प्राप्त होंगे जो कोई भी पक्ष अकेले हासिल नहीं कर सकता। इन शक्तियों को मिलाकर, हम रणनीतिक निर्भरता को कम करते हैं। ऐसे समय में जब व्यापार का तेजी से हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।’’

रक्षा साझेदारी समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप और भारत ने एक-दूसरे के विश्वसनीय साझेदार बनने का विकल्प चुना है।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हस्ताक्षरित प्रमुख समझौते नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘व्यापार समझौते नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। इसीलिए आज का मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है, जो दो अरब लोगों का बाजार तैयार करता है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ का व्यापक रणनीतिक एजेंडा एक ‘स्पष्ट दिशा’ प्रदान करेगा और नवाचार को गति देकर, सुरक्षा सहयोग को मजबूत करके और लोगों के बीच संबंधों को गहरा करके साझा समृद्धि को आगे बढ़ाएगा।

मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति सहित कई वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा, ‘‘ बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का सम्मान हमारी साझा प्राथमिकताएं हैं। हम इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है।’’

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने यूक्रेन पर यूरोप के लंबे समय से जारी रुख को भी दोहराया।

उन्होंने कहा, ‘‘ शांति, हथियारों के दम पर नहीं बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रों द्वारा किए गए न्यायपूर्ण व्यवहार से कायम होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे शिखर सम्मेलन ने यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। एक ऐसी शांति जो यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण सम्मान करती है।’’

कोस्टा ने कहा कि यूरोप भी संवाद और कूटनीति के जरिये शांति कायम करने में प्रधानमंत्री मोदी से सहयोग की उम्मीद कर रहा है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि शिखर सम्मेलन के दौरान, नेताओं ने लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद, कानून का शासन एवं संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सहित साझा मूल्यों और सिद्धांतों के आधार पर भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को उच्च स्तर पर ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडा एक दूरदर्शी कार्य योजना है जो तेजी से जटिल होते भू-राजनीतिक माहौल में दोनों पक्षों की विश्वसनीय, भरोसेमंद एवं समान विचारधारा वाले साझेदारों के रूप में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इसका मुख्य उद्देश्य यूरोप, भारत और व्यापक विश्व के बीच संपर्क को मजबूत करना, व्यापार मार्गों में विविधता लाने और रणनीतिक निर्भरता को कम करने के लिए भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के तहत रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना, क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना और आपूर्ति श्रृंखलाओं को भविष्य के लिए तैयार करना होगा।

दोनों पक्ष सतत समुद्री संपर्क को मजबूत करने के लिए ‘हरित पोत परिवहन गलियारा’ विकसित करने पर काम करेंगे। बाजार सहयोग को मजबूत बनाने और प्रत्यक्ष संपर्क का विस्तार करने के तरीकों का पता लगाने के लिए विमानन पर नियमित संवाद स्थापित करेंगे। दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और जी20 सहित बहुपक्षीय मंचों में समन्वय, घनिष्ठ सहयोग एवं संयुक्त कार्रवाई को बढ़ाने के लिए भी काम करेंगे।

मंत्रालय ने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय संस्थानों में सुधारों के मुद्दे पर चर्चा करेंगे ताकि वे समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अधिक प्रतिनिधित्व कर सकें।

भाषा निहारिका रमण

रमण


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