इंडियन ऑटो एलपीजी कोअलिशन ने टेरी के ईंधन अध्ययन में वाहन एलपीजी को शामिल करने को कहा
इंडियन ऑटो एलपीजी कोअलिशन ने टेरी के ईंधन अध्ययन में वाहन एलपीजी को शामिल करने को कहा
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) भारत के ऊर्जा बदलाव में वाहनों के ईंधन विकल्पों का आकलन करने वाले टेरी के अध्ययन में वाहन एलपीजी (वाहन गैस) को शामिल करना चाहिए। इंडियन ऑटो एलपीजी कोअलिशन (आईएसी) ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) से इस बारे में आग्रह किया है।
पीएनजीआरबी को दिए गए एक औपचारिक प्रतिवेदन में गठबंधन ने ‘भारत के ऊर्जा बदलाव में वाहनों के ईंधन का तुलनात्मक मूल्यांकन — एक बहुआयामी दृष्टिकोण’ नामक अध्ययन में वाहन एलपीजी को शामिल करने की मांग की है।
नियामक ने यह अध्ययन नीति निर्माताओं को परिवहन के क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने, हवा की गुणवत्ता में सुधार और टिकाऊ गतिशीलता पर साक्ष्य आधारित सुझाव देने के लिए शुरू किया है। यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
आईएसी ने एक बयान में अपने प्रतिवेदन का विवरण देते हुए कहा कि वाहन एलपीजी को बाहर रखने से मूल्यांकन अधूरा और संभावित रूप से पक्षपाती हो जाएगा। खासतौर से अध्ययन के गैसीय ईंधन पर ध्यान केंद्रित करने और शहरी गैस वितरण संस्थाओं की भागीदारी को देखते हुए ऐसा होने की आशंका है।
गठबंधन ने कहा कि ऑटो एलपीजी एक सिद्ध और तुरंत लागू करने योग्य संक्रमणकालीन ईंधन है, जिसकी भारत में महत्वपूर्ण परिचालन भूमिका है और इसे संतुलित, तकनीक तटस्थ मूल्यांकन का हिस्सा होना चाहिए।
वैश्विक स्तर पर वाहन एलपीजी लगभग 80,000 ‘रिफ्यूलिंग स्टेशनों’ के माध्यम से तीन करोड़ से अधिक वाहनों को शक्ति देती है।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण

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