नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) भारत में ऑनलाइन बाजारों में इस्तेमाल किए जा रहे भ्रामक ‘इंटरफेस डिजाइन’ (डार्क पैटर्न) के कारण उपभोक्ताओं को हर साल अनुमानित 25,000 करोड़ से 28,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
बाजार पर शोध करने वाली फर्म ‘डेटम इंटेलिजेंस’ ने मंगलवार को जारी ‘डार्क पैटर्न इन इंडिया’ रिपोर्ट में कहा है कि देश के 30.4 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों में से 88 प्रतिशत उपभोक्ता छिपे हुए शुल्क, जबरन अतिरिक्त सेवाओं, झूठी तात्कालिकता और सब्सक्रिप्शन के जाल जैसे तरीकों के कारण हर महीने लगभग 78 से 87 रुपये तक गंवा रहे हैं।
‘डार्क पैटर्न’ एक ऐसा जाल है, जो ऑनलाइन मंचों में उपयोगकर्ताओं को खरीदारी करने के लिए भ्रमित या मजबूर करने के मकसद से तैयार किया जाता है। इसमें छिपे शुल्क समेत अन्य लुभावने अवसर दिए जाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘मौजूदा नियामकीय हस्तक्षेपों को अब तक लाखों उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली भ्रामक डिजिटल व्यवहार पर अंकुश लगाने में सीमित रूप से ही सफलता मिल सकी है।’’
सर्वेक्षण के अनुसार, अब 63 प्रतिशत ऑनलाइन भुगतान उपयोगकर्ता छिपे हुए शुल्क का सामना कर रहे हैं, जिसमें खरीदारी के अंतिम चरण में अतिरिक्त शुल्क जोड़े जाते हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2024 में 52 प्रतिशत था।
इसके अलावा, अध्ययन में शामिल 73 प्रतिशत मंच पर फोर्स्ड एक्शन मैकेनिज्म (जबरन कार्रवाई) पाए गए, जिनमें उपयोगकर्ताओं को ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिन्हें वे सामान्यतः नहीं चुनते।
यह अध्ययन ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ट्रैवल क्षेत्र के 12 प्रमुख मंच का विश्लेषण करके तैयार किया गया है।
सर्वेक्षण 2026 की पहली तिमाही में 50 शहरों के 2,590 उपभोक्ताओं के बीच किया गया।
भाषा यासिर अजय
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