चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमानः इंडिया रेटिंग्स
चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमानः इंडिया रेटिंग्स
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का मंगलवार को अनुमान जताते हुए कहा कि मांग एवं आपूर्ति दोनों में सुस्ती और वैश्विक अनिश्चितताएं इसकी प्रमुख वजह होंगी।
रेटिंग एजेंसी का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान से कम है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति दर 4.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है।
हालांकि, इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि ईंधन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद खुदरा मुद्रास्फीति 4.4 प्रतिशत पर रह सकती है जो कि आरबीआई के लक्षित दायरे के भीतर ही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ेगा। साथ ही, 2026 के मध्य से मौसमी चक्र ‘अल नीनो’ की वजह से कृषि उत्पादन के प्रभावित होने की भी आशंका है, जिससे आर्थिक वृद्धि पर दबाव आएगा।
इंडिया रेटिंग्स की निदेशक (अर्थशास्त्र) मेघा अरोड़ा ने कहा, ‘‘प्रमुख चुनौतियों में भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची मुद्रास्फीति, कमजोर पूंजी प्रवाह के कारण रुपये में गिरावट, सरकार के पूंजीगत व्यय में संभावित कमी, वैश्विक व्यापार की धीमी रफ्तार और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की कमजोर स्थिति शामिल हैं।’’
रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। इसके अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो आर्थिक वृद्धि दर पर लगभग 0.44 प्रतिशत अंक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि पूंजीगत व्यय में 10 प्रतिशत की कमी आती है, तो वृद्धि दर घटकर करीब छह प्रतिशत तक आ सकती है।
एजेंसी का मानना है कि सरकार सीधे नकद अंतरण के बजाय आसान कर्ज और ‘क्रेडिट गारंटी’ जैसे उपायों के जरिये छोटे उद्योगों और उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है।
रिपोर्ट कहती है कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि अल नीनो का असर जुलाई-सितंबर तिमाही में अधिक दिख सकता है।
इंडिया रेटिंग्स का अनुमान है कि रुपये की विनिमय दर औसतन 94.28 प्रति डॉलर रह सकती है, जो सालाना आधार पर 6.7 प्रतिशत की गिरावट है।
मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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