जयपुर, नौ जून (भाषा) भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार अग्रिम कौशल ने मंगलवार को कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का निर्यात लगातार बढ़ा है। सरकार की नीतियों, डिजिटल सुविधाओं, बेहतर लॉजिस्टिक और व्यापार सुधारों को इसका सीधा फायदा मिला है।
कपड़ा निर्यात संवर्द्धन परिषद (एईपीसी) और भारत सरकार के वाणिज्य विभाग की ओर से मंगलवार को जयपुर में आयोजित क्षेत्रीय मीडिया संवाद में कौशल ने प्रधानमंत्री की फाइव एफ परिकल्पना ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्टरी, फैक्टरी टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ के माध्यम से भारत को वैश्विक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की अग्रणी शक्ति बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
‘वैश्विक परिधान व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत बनाना: अवसर, चुनौतियां और आगे की राह’ विषय पर आधारित संवाद में उन्होंने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई योजना), पीएम मित्र योजना, मेगा टेक्सटाइल पार्क, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन तथा विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन उपायों जैसी प्रमुख पहलों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने भारत की वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया है और वैश्विक बाजार में देश की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई है।
कौशल ने भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के नेटवर्क और हाल ही में शुरू किए गए निर्यात संवर्द्धन मिशन (ईपीएम) से उत्पन्न अवसरों पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, जयपुर आज राजस्थान का सबसे बड़ा परिधान निर्यात केंद्र बन चुका है। राज्य के कुल रेडिमेड गारमेंट (सिलेसिलाए परिधान) निर्यात में जयपुर की हिस्सेदारी लगभग 86 प्रतिशत है। यहां के निर्यातक पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक का सफलतापूर्वक समन्वय करते हुए अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया-प्रशांत के बाजारों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं।
कार्यक्रम के दौरान राजस्थान गारमेंट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (जीईएआर) के अध्यक्ष रक्षित पोद्दार ने कहा कि जयपुर के निर्यातकों ने समय के साथ वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाला है और साथ ही अपनी विशिष्ट डिजाइन एवं हस्तशिल्प पहचान को भी बनाए रखा है।
एईपीसी की कार्यकारी समिति के सदस्य असीम कुमार ने कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन, टिकाऊ उत्पादन और बेहतर आधारभूत ढांचे में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाषा बाकोलिया धीरज अजय
अजय