ऊर्जा संकट के मद्देनजर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास में तत्परता आनी चाहिए: आईएटीए प्रमुख

ऊर्जा संकट के मद्देनजर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास में तत्परता आनी चाहिए: आईएटीए प्रमुख

ऊर्जा संकट के मद्देनजर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास में तत्परता आनी चाहिए: आईएटीए प्रमुख
Modified Date: June 7, 2026 / 07:53 pm IST
Published Date: June 7, 2026 7:53 pm IST

(मनोज राममोहन)

रियो डी जेनेरियो, सात जून (भाषा) मौजूदा ऊर्जा संकट को देखते हुए टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ) समेत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास में और भी अधिक तत्परता आनी चाहिए तथा इस वर्ष आईएटीए उत्पादन लगभग 24 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो वैश्विक विमान ईंधन उपयोग का केवल 0.8 प्रतिशत है।

विमानन कंपनियों के समूह आईएटीए ने कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया संकट के कारण विमान ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और एयरलाइन की परिचालन लागत भी बढ़ गई है।

एसएएफ का उत्पादन बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) ने नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति का विस्तार करने, नीतिगत समर्थन को मजबूत करने, ईंधन अवसंरचना तक खुली पहुंच सुनिश्चित करने और अन्य उपाय लागू करने का सुझाव दिया है।

आईएटीए विश्व भर में लगभग 370 एयरलाइन का प्रतिनिधित्व करता है।

आईएटीए के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा, ‘‘मौजूदा ऊर्जा संकट को देखते हुए एसएएफ समेत नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए और अधिक तत्परता दिखाई जानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमने अब तक ऊर्जा संकट, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की आवश्यकता, रोजगार सृजन और जलवायु परिवर्तन से निपटने की तात्कालिकता को ऐसे प्रोत्साहनों में परिवर्तित नहीं किया है, जो एक व्यवहार्य एसएएफ बाजार बनाने के लिए जरूरी हैं।’’

आईएटीए में ‘नेट जीरो रिसर्च एंड प्रोग्राम’ की प्रमुख प्रीति जैन ने कहा कि एसएएफ का उत्पादन 24 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि उत्पादन क्षमता लगभग 90 लाख टन है।

उन्होंने शनिवार को यहां आईएटीए की वार्षिक आम बैठक से इतर जानकारी देते हुए कहा कि मौजूदा नीतिगत ढांचे के कारण इस क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि यह ढांचा नवीकरणीय डीजल के उत्पादन को अधिक प्राथमिकता देता है।

वॉल्श ने कहा कि एसएएफ उत्पादन के लिए यह एक और निराशाजनक वर्ष प्रतीत होता है।

आईएटीए ने कहा कि एसएएफ का उत्पादन 2026 में लगभग 24 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो विमानन ईंधन के उपयोग का केवल 0.8 प्रतिशत है और एयरलाइंस के लिए इसकी लागत 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर होगी।

आईएटीए की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं मुख्य अर्थशास्त्री मैरी ओवेन्स थॉमसन ने कहा कि अगर किसी ऐसे बाजार में अनिवार्य नियम लागू किए जाते हैं, जहां उत्पाद पर्याप्त रूप से उपलब्ध ही नहीं है, तो कीमतें बढ़ जाती हैं, जैसा कि यूरोप और ब्रिटेन में देखा गया है।

भाषा यासिर पारुल

पारुल


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