एसटीएमएआई ने चीन से सीमलेस पाइप के आयात में तेजी को लेकर जतायी चिंता

एसटीएमएआई ने चीन से सीमलेस पाइप के आयात में तेजी को लेकर जतायी चिंता

एसटीएमएआई ने चीन से सीमलेस पाइप के आयात में तेजी को लेकर जतायी चिंता
Modified Date: March 30, 2026 / 06:28 pm IST
Published Date: March 30, 2026 6:28 pm IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) सीमलेस ट्यूब मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसटीएमएआई) ने सोमवार को पिछले तीन-चार साल में चीन से सीमलेस पाइप के आयात में हुई भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताई। एसोसिएशन ने सरकार से घरेलू उद्योग को बचाने के लिए डंपिंगरोधी के और भी सख्त उपाय लागू करने की अपील की।

सीमलेस पाइप उद्योग देश के बुनियादी ढांचा के विकास में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, कुछ आयातक चोरी-छिपे चीन से घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद मंगा रहे हैं और उन्हें भारतीय बाज़ार में बेच रहे हैं।

एक बयान में, एसटीएमएआई के अध्यक्ष शिव कुमार सिंघल ने कहा कि पिछले तीन-चार साल में चीन से सीमलेस पाइप का आयात तेजी से बढ़ा है।

हालांकि सरकार ने घरेलू विनिर्माताओं को बचाने के लिए सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, लेकिन सिंघल ने इस बात पर जोर दिया कि इन उपायों को और भी सख्ती से लागू करने की जरूरत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आयातक कर और शुल्क से बचने के लिए ‘ओवर-इनवॉइसिंग’ (कीमत बढ़ाकर दिखाना) जैसे गलत तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ‘सीमा शुल्क मंजूरी’ के दौरान उत्पादों की कीमत ज्यादा बताई जाती है, जबकि बाद में उन्हें घरेलू बाजार में काफी कम कीमतों पर बेचा जाता है, इससे निष्पक्ष व्यापार के नियमों का उल्लंघन होता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस चलन पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे न सिर्फ घरेलू विनिर्माताओं को नुकसान होगा, बल्कि देश के अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

भारत के सीमलेस पाइप उद्योग की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 19.5 लाख टन है, जबकि घरेलू बाजार में इसकी मांग लगभग 13.2 लाख टन है।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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