डब्ल्यूईएफ ने ‘विभाजित’ वैश्विक अर्थव्यवस्था से लोगों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को लेकर आगाह किया

डब्ल्यूईएफ ने ‘विभाजित’ वैश्विक अर्थव्यवस्था से लोगों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को लेकर आगाह किया

: , May 23, 2022 / 09:29 PM IST

दावोस, 23 मई (भाषा) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के मुख्य अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को विभाजित वैश्विक अर्थव्यवस्था से लोगों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को लेकर आगाह किया। इन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष ऋण संकट और खाद्य तथा ईंधन सुरक्षा के बीच सामंजस्य का संकट है।

मुख्य अर्थशास्त्रियों की विश्व अर्थव्यवस्था के परिदृश्य पर रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे अधिक महंगाई की आशंका अमेरिका में है। उसके बाद यूरोप तथा लातिनी अमेरिकी देशों का स्थान है। इसके अलावा उच्च और निम्न आय वाली दोनों अर्थव्यवस्थाओं में वास्तविक मजदूरी में कमी का अनुमान है।

इसमें यह भी कहा गया है कि दुनिया के समक्ष खाद्य संकट की स्थिति है। खासकर यह संकट पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका, उप-सहारा अफ्रीका तथा दक्षिण एशिया में ज्यादा है। हाल-फिलहाल के इतिहास में यह गंभीर स्थिति है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियां वैश्विक स्थिति के अनुसार आपूर्ति श्रृंखलाओं को व्यवस्थिति कर रही हैं। इससे कीमत में तेजी आने की आशंका है।

डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में विश्व आर्थिक मंच के मुख्य अर्थशास्त्रियों ने विश्व अर्थव्यवस्था के परिदृश्य पर अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए 2022 में आर्थिक गतिविधियों में नरमी, उच्च मुद्रास्फीति, वास्तविक मजदूरी में कमी और वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा की आशंका जतायी। यह विभाजित वैश्विक अर्थव्यवस्था के लोगों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव की ओर इशारा करता है।

रिपोर्ट में पुनरुद्धार के पूर्व अनुमान को भी पलट दिया गया है। इसमें ज्यादातर प्रतिभागियों ने अमेरिका, चीन, लातिनी अमेरिका, दक्षिण एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अफ्रीका में इस साल हल्के आर्थिक परिदृश्य का अनुमान जताया गया है। यूरोप में भी ज्यादातर ने आर्थिक परिदृश्य कमजोर रहने का अनुमान जताया है।

डब्ल्यूईएफ के प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा, ‘‘ हम एक ऐसे दुष्चक्र के मुहाने पर हैं जो कई साल तक समाज को प्रभावित कर सकता है। यूक्रेन में महामारी और युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को विभाजित कर दिया है। इससे दूरगामी परिणाम सामने आएं हैं जिससे पिछले 30 वर्ष के दौरान जो लाभ हुआ है, उसके खोने का जोखिम है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष ऋण संकट और खाद्य तथा ईंधन सुरक्षा के बीच सामंजस्य का संकट है।

भाषा

रमण अजय

अजय

 

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