एलपीजी की कमी के कारण अपने गांव लौटने लगे हैं मज़दूर : एसीएमए

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एलपीजी की कमी के कारण अपने गांव लौटने लगे हैं मज़दूर : एसीएमए

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 08:08 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 08:08 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) वाहन कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण अपने मज़दूरों के गांव लौटने की समस्या का सामना कर रही हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। एसीएमए ने सोमवार को कहा कि यह स्थिति कोविड महामारी जितनी मुश्किल तो नहीं है, लेकिन अगर इसे जल्द हल नहीं किया गया, तो यह और बिगड़ सकती है।

भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एसीएमए) 1,064 से ज़्यादा विनिर्माताओं का प्रतिनिधित्व करता है। ये विनिर्माता संगठित क्षेत्र में वाहन कलपुर्जा उद्योग के कुल कारोबार में 90 प्रतिशत से ज़्यादा का योगदान देते हैं।

एसीएमए के महानिदेशक, विन्नी मेहता ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘मज़दूर खाना पकाने के लिए छोटे गैस बर्नर का इस्तेमाल करने लगे थे, क्योंकि वायु प्रदूषण के कारण लकड़ी जलाने को हतोत्साहित किया जा रहा था। अब, एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण उन्हें घर पर खाना बनाना मुश्किल हो रहा है। साथ ही, कुछ फैक्ट्रियों की कैंटीन भी बंद हैं, जिसके चलते उन्हें अपने गांव लौटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अभी स्थिति कोविड महामारी जैसी तो नहीं है, लेकिन अगर इसे जल्द हल नहीं किया गया, तो यह और बिगड़ सकती है।’’

वित्त वर्ष 2024-25 में वाहन कलपुर्जा उद्योग का कुल कारोबार 80.2 अरब डॉलर रहा। इसमें 22.9 अरब डॉलर का निर्यात और 50 करोड़ डॉलर का व्यापार अधिशेष शामिल है।

ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण आपूर्ति में रुकावटें आई हैं। ऐसे में सरकार घरेलू उपभोक्ताओं पर ज़्यादा ध्यान दे रही है, जिससे उद्योग को वाणिज्यिक एलपीजी नहीं मिल पा रही है। इस समस्या को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नौ मार्च को एक समिति का गठन किया, जो उद्योग की शिकायतों और सुझावों पर विचार करेगी।

पश्चिम एशिया संकट के कारण सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के आवंटन की प्राथमिकता सूची में बदलाव किया है।

पिछले हफ़्ते भारी उद्योग मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, एसीएमए ने कहा था कि यह उद्योग वैश्विक वाहन मूल्य श्रृंखलाओं के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में अगर समय पर सहायता मिलती है, तो इससे निर्यात की निरंतरता बनी रहेगी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता भी सुरक्षित रहेगी।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

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