आने वाले दिनों में देश में 'कंपनी राज' देखने को मिलेगा : टिकैत |

आने वाले दिनों में देश में ‘कंपनी राज’ देखने को मिलेगा : टिकैत

आने वाले दिनों में देश में 'कंपनी राज' देखने को मिलेगा : टिकैत

: , September 28, 2021 / 06:55 PM IST

राजिम (छत्तीसगढ़), 28 सितंबर (भाषा) भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा है कि देश की पूरी संपत्ति को बिक्री के लिए रख दिया गया है और आने वाले दिनों में देश में ‘कंपनी राज’ देखने को मिलेगा।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम कस्बे में मंगलवार को टिकैत ने किसान महापंचायत को संबोधित किया और युवाओं से भूमि, फसल और आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के तत्वावधान में सैकड़ों किसानों ने इस महापंचायत में भाग लिया।

टिकैत ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब किसानों को अपना ​हसिया (कृषि उपकरण) छोड़कर क्रांति की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि हमें केंद्र की तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ना है।

उन्होंने कहा कि हम दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 10 महीनों से विरोध कर रहे हैं और अगर हमारी मांगें पूरी नहीं की गईं तब सभी राज्यों की राजधानी में यह आंदोलन होगा।

उन्होंने कहा कि किसानों को सब्जियों और दूध सहित उनकी हर उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए।

टिकैत ने कहा कि जब तक केंद्र कानून वापस नहीं लेता है तब तक किसानों को पीछे नहीं हटना है। उन्होंने कहा कि आपको इस आंदोलन का समर्थन करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली विरोध विफल रहता है, तब भविष्य में ऐसा कोई आंदोलन नहीं हो पाएगा।

केंद्र की नीतियों पर निशाना साधते हुए किसान नेता ने कहा कि रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह और एलआईसी (निजी हाथों को) बेचे जा रहे हैं और देश की पूरी संपत्ति को बिक्री के लिए रखा गया है।

टिकैत ने आरोप लगाया कि वह देश को लूटने आए हैं और वह चाहते हैं कि सब कुछ निजी क्षेत्रों के हाथों में चला जाए। उन्होंने दावा किया कि इससे देश जल्द ही ‘कंपनी राज’ को देखेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों को निशाना बनाया जा रहा है तथा अगला निशाना मीडिया होगा।

टिकैत ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि वह देश को जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आपको उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल एक ही बात जाननी चाहिए कि हम सभी एक ही समुदाय के हैं वह समुदाय किसान है।

उन्होंने युवाओं से विरोध में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को जन-जन तक ले जाना होगा। देश को युवाओं द्वारा क्रांति की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को युवाओं को ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आगे बढ़ाना होगा।

किसान महापंचायत को सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर और संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। इस महापंचायत में पंजाब और हरियाणा के किसानों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

पिछले वर्ष सितंबर माह में संसद में तीन कृषि कानूनों को पारित किया गया था।

केंद्र सरकार ने इन कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया है। लेकिन किसान संघ के नेता पिछले वर्ष नवंबर माह से इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे है।

भाषा संजीव

संजीव रंजन

रंजन

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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