कोरोनाकाल में शिक्षिका ने स्थापित किए आदर्श, गांव के युवक-युवतियों के लिए बनी प्रेरणास्त्रोत
कोरोनाकाल में शिक्षिका ने स्थापित किए आदर्श, गांव के युवक-युवतियों के लिए बनी प्रेरणास्त्रोत
रायपुर। बच्चों के भविष्य की चिंता हमेशा एक सच्चे शिक्षक को ही होती हैं। 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। शिक्षक दिवस के मौके पर हम आपको ऐसे ही एक शिक्षक की कहानी बता रहे हैं, जिनका नाम है सुनीला फ्रैंकलीन
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इस करोना काल के दौरान लॉकडाउन में सबसे ज्यादा किसी का नुकसान हुआ है, तो वह बच्चों की पढ़ाई का । बच्चों का भविष्य ना बिगड़े इसलिए आज भी ऐसे कई शिक्षक हैं जो कि बच्चों का भविष्य संवारने में जी जान लगाए हुए हैं। ऐसे ही कई शिक्षकों में से एक शिक्षिका हैं सुनीला फ्रैंकलीन… जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कचना गांव में प्राथमिक शाला की शिक्षिका हैं, कोरोनाकाल को देखते हुए वैसे तो ऑनलाइन क्लासेस चला कर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। वहीं जिन गरीब बच्चों के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है,उन्हें ये शिक्षिका पूरे पाठ ओर चैप्टर की ऑडियो क्लिप बनाकर ब्लूटूथ के माध्यम से कीपैड वाले मोबाइल पर सेंड कर रही हैं।
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सुनीला फ्रैंकलीन बच्चों के घर जाकर के उनका परिवार को बता रही हैं कि जब भी समय मिले, इसे सुनकर पढ़ाई करें और जो बच्चे किसी कारण पढ़ाई से वंचित हैं, उन्हें भी शिक्षिका फोन करके कांफ्रेंस में लेकर ऑनलाइन माध्यम से पढ़ा रही हैं। गांव में ये शिक्षिका कोरोना संक्रमण से बच्चों को कैसे बचना है, ये भी सिखा रही हैं। इसके साथ ही गांव के पढ़े लिखे लोगों को भी शिक्षक मित्र के रुप में अपने साथ जोड़ कर बच्चों को शिक्षा देने में लगी हुई हैं। शिक्षिका मुंह पर मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंस का भी पालन करवा रही हैं, ताकि बच्चों में संक्रमण ना पहले और पढ़ाई का भी नुकसान ना हो, इन्होंने तुवर दुआर स्कूल जिसमें गांव के पढ़े-लिखे युवक-युवतियों को शिक्षा मित्र, शिक्षा सखी के रूप में तैयार किया..और गांव के चौपाल, सामुदायिक भवन, मंदिर, चबूतरे पर मोहल्ला स्कूल लगाकर मोहल्ले के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। खास बात यह है कि गांव में कॉलेज की पढ़ाई कर रहे युवा भी इस शिक्षिका के साथ जुड़कर जोश और उत्साह के साथ छोटे-छोटे बच्चों को चौक चौराहों में पहुंचकर पढ़ाई करवा रहे हैं।

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