(अनिल भट्ट)
कटाल बटाल (नगरोटा), 24 मई (भाषा) करीब दस महीने पहले अचानक आई बाढ़ में कई गांवों और प्रसिद्ध राजा पद देवता मंदिर को जोड़ने वाला तवी नदी पर बना एक महत्वपूर्ण पुल बह जाने के बाद नगरोटा के कटाल बटाल क्षेत्र के सैकड़ों निवासी आज भी अपनी रोजमर्रा की आवाजाही के लिए नावों पर निर्भर हैं। मानसून के नजदीक आने से उनके लंबे समय तक अलग-थलग पड़ जाने की आशंकाएं फिर बढ़ गई हैं।
यह पुल 4,000 से 5,000 आबादी वाले कई गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र सड़क संपर्क था और मंदिर तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग भी था। पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ में यह पुल बह गया था। तब से ग्रामीणों, छात्रों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को स्कूल, कार्यस्थल और बाजार पहुंचने के लिए नावों के जरिए नदी पार करनी पड़ रही है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बारिश के दौरान तवी नदी का जलस्तर बढ़ने पर उनकी जिंदगी लगभग ठहर जाती है, क्योंकि सुरक्षा कारणों से नौका सेवाएं बंद कर दी जाती हैं।
कटाल बटाल निवासी राजेश कुमार ने कहा, ‘‘हम अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। दस महीने से ज्यादा समय हो गया है और पुल बह जाने के बाद हम पूरी तरह शेष हिस्सों से कट गए हैं। यही पुल कई गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र सड़क संपर्क था। इस दौरान सरकार ने कुछ नहीं किया।’’
ग्रामीणों का आरोप है कि मंत्रियों, नेताओं और सरकारी प्रतिनिधियों के बार-बार दिए गए आश्वासन अब तक खोखले साबित हुए हैं, जिससे पूरा इलाका राज्य के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है और लोग रोजमर्रा की परेशानियों से जूझ रहे हैं।
संतोष सिंह नामक व्यक्ति ने कहा, ‘‘पुल टूटने के बाद शुरुआती कई महीनों तक छात्रों, कर्मचारियों, मजदूरों और व्यापारियों के लिए केवल एक नाव उपलब्ध थी। अब तीन नाव चल रही हैं, जो हर दिन कई गांवों के सैकड़ों लोगों को नदी पार कराती हैं।’’
उन्होंने कहा कि विधायकों ने तवी नदी पर पुल बनाने का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘हमें नजरअंदाज और अलग-थलग कर दिया गया है। यह सरकार के लिए शर्म की बात है।’’
फिलहाल नाव सेवा ही संपर्क का एकमात्र व्यावहारिक साधन है, जिसे पुल बह जाने के बाद गांवों को पूरी तरह अलग-थलग होने से बचाने और लोगों की रोजाना आवाजाही आसान बनाने के लिए शुरू किया गया था।
हालांकि, लोगों को डर है कि मानसून के दौरान तवी नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह व्यवस्था भी ठप पड़ जाएगी।
जम्मू से राजा पद देवता मंदिर में एक समारोह में शामिल होने आई श्रद्धालु अंजू गुप्ता ने कहा, ‘‘पुल टूटा हुआ है, चारों तरफ पानी है, इसलिए आने-जाने का कोई रास्ता नहीं है। हम प्रशासन से इस मामले पर ध्यान देने की अपील करते हैं। कई लोग यहां आए और वादे किए, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।’’
अन्य श्रद्धालु देविका ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भी प्रभावित कर रही है, खासकर धार्मिक आयोजनों के दौरान।
स्थानीय निवासी दियान चंद ने कहा, ‘‘समस्या बहुत गंभीर है। महिलाएं और छोटे बच्चे नियमित रूप से इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। अस्थायी व्यवस्था सुरक्षित नहीं है और यदि एक जगह ज्यादा लोग इकट्ठा हो जाएं तो हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। पानी का स्तर बढ़ते ही हमें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हमने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार को जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।’’
अभिभावकों ने भी रोज इस रास्ते से आने-जाने वाले स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
ग्रामीण मोनिका ने कहा, ‘‘कई बच्चे पहली और दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं। वे सुरक्षित तरीके से कैसे यात्रा करेंगे? माता-पिता हर समय चिंतित रहते हैं। अगर किसी बच्चे के साथ हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? हमने कई बार प्रशासन से समस्या हल करने की अपील की है।’’
भाषा गोला नेत्रपाल
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