इंफाल, नौ जून (भाषा) मणिपुर के सेनापति जिले में सशस्त्र समूहों द्वारा करीब एक महीने पहले अपहृत किए गए 14 कुकी बंधकों को मंगलवार को मुक्त कर दिया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने बंधकों को सुरक्षित रूप से मुक्त किए जाने का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक एवं मानवीय कदम बताया तथा हर प्रकार की हिंसा त्यागने की अपील की।
इन 14 लोगों का 13 मई को कांगपोकपी जिले में घात लगाकर किए गए हमले में गिरजाघर के तीन नेताओं की हत्या के बाद अपहरण कर लिया गया था। मणिपुर में नगा समुदाय के शीर्ष निकाय ‘यूनाइटेड नगा काउंसिल’ (यूएनसी) और सेनापति जिले के अन्य नागरिक समाज संगठनों के प्रयासों से इन्हें मुक्त कराने में मदद मिली।
अधिकारी ने कहा, ‘‘इन सभी को पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सेनापति जिला मुख्यालय में सकुशल मुक्त कर दिया गया।’’
यूएनसी के अध्यक्ष एनजी लोरहो ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों, गिरजाघर संगठनों तथा शीर्ष जनजातीय संगठन की अपील के बाद बंधकों को मुक्त किया गया।
लोरहो ने कहा, ‘‘नगा सुसंस्कृत लोग हैं। हम मानवाधिकारों का सम्मान करते हैं। हमने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नगालैंड के मुख्यमंत्री एन. रियो को दिए गए इस आश्वासन को भी ध्यान में रखा कि लापता छह नगा लोगों का पता लगाया जाएगा।’’
कांगपोकपी जिले में घात लगाकर किए गए हमले में गिरजाघर के तीन नेताओं की हत्या के कुछ घंटों बाद 13 मई को कांगपोकपी और सेनापति जिलों में सशस्त्र समूहों ने 50 से अधिक लोगों का अपहरण कर उन्हें बंधक बना लिया था।
इनमें से 31 लोगों को पहले ही मुक्त कर दिया गया था जिनमें कोंसाखुल गांव की 12 नगा महिलाएं और कांगपोकपी जिले के 16 कुकी लोग शामिल थे।
हालांकि, छह नगा पुरुष अब भी बंधक हैं और इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वे इस समय कहां है।
लोरहो ने बताया कि यूएनसी ने सभी हितधारकों से चर्चा के बाद 14 कुकी लोगों की सुरक्षित रिहाई में मदद की और उन्हें जिला प्रशासन, पुलिस एवं सुरक्षा बलों को सौंप दिया।
मुक्त किए गए लोगों में शामिल ताफौ कुकी गांव के पाओतिनकाई चोंगलोई ने कहा, ‘‘हमें ‘नगा विलेज गार्ड’ के तहत 27 दिन तक हिरासत में रखा गया। हमारे साथ अच्छा व्यवहार किया गया और अच्छा भोजन दिया गया।’’
मुख्यमंत्री ने बंधकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने में नगा समाज की भूमिका की सराहना की और इसे ‘‘करुणा, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति चिंता की भावना’’ बताया।
सिंह ने कहा कि मौजूदा संकट के कारण पीड़ितों और उनके परिवारों को भारी कष्ट झेलना पड़ रहा है। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, 14 कुकी लोगों को एक जून को ही मुक्त किया जा सकता था लेकिन यूएनसी ने पूर्वोत्तर राज्य के आदिवासी समुदाय के कुछ युवा नेताओं और ‘‘हितधारकों’’ के साथ मतभेद के बाद उनकी निर्धारित रिहाई स्थगित कर दी थी। यह राज्य तीन साल से हिंसा की चपेट में है।
मणिपुर में मई 2023 से मेइती समुदाय और कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं।
लगातार झड़पों और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। इसे करीब एक साल बाद इस साल चार फरवरी को हटा लिया गया।
भाषा
सिम्मी माधव
माधव