हरियाणा में 2025 तक 35 प्रतिशत पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया
हरियाणा में 2025 तक 35 प्रतिशत पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया
चंडीगढ़, 15 मार्च (भाषा) हरियाणा की कुल ग्राम पंचायतों में से लगभग 35 प्रतिशत पंचायतें 2025 में सत्यापन के बाद टीबी-मुक्त घोषित किए जाने के योग्य पाई गई हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने रविवार को दी।
मिश्रा ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत पहल के तहत राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है और कुल 6,237 पंचायतों में से 2,157 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित होने के योग्य पाई गई हैं।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विश्व तपेदिक दिवस के अवसर पर 24 मार्च 2023 को वाराणसी में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को टीबी से जुड़ी समस्याओं को समझने, समाधान के लिए कदम उठाने और पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में टीबी मुक्त अभियान के तहत टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जो जमीनी स्तर पर कार्यक्रम की बढ़ती गति को दर्शाती है।
वर्ष 2023 में राज्य में 574 पंचायतों को प्रमाणन मिला था, जो सभी ‘ब्रॉन्ज’ श्रेणी में थीं और कुल पंचायतों का लगभग नौ प्रतिशत थीं। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,855 हो गई, जिसमें 1,542 ब्रॉन्ज और 313 सिल्वर श्रेणी की पंचायतें शामिल थीं, जो राज्य की लगभग 30 प्रतिशत पंचायतों को शामिल करती हैं।
वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,157 पंचायतों तक पहुंच गई है, जो कुल पंचायतों का 35 प्रतिशत है।
मिश्रा ने बताया कि इस पहल में तीन-स्तरीय प्रमाणन प्रणाली अपनाई गई है। पहली बार टीबी-मुक्त रहने वाली पंचायतों को ब्रॉन्ज, लगातार दो वर्ष तक स्थिति बनाए रखने पर सिल्वर और तीन वर्षों तक इसे बनाए रखने पर गोल्ड प्रमाणन दिया जाता है।
प्रमाणपत्र हर साल विश्व तपेदिक दिवस पर जिला उपायुक्त द्वारा जारी किए जाते हैं और उनकी वैधता एक वर्ष होती है।
वर्ष 2025 में पात्र पाई गई 2,157 पंचायतों में से 211 को गोल्ड, 646 को सिल्वर और 1,300 को ब्रॉन्ज श्रेणी के लिए योग्य पाया गया है।
भाषा राखी दिलीप
दिलीप

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