क्रिप्टोकरेंसी में एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत से इनकार
क्रिप्टोकरेंसी में एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत से इनकार
नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने क्रिप्टोकरेंसी के रूप में करीब एक करोड़ रुपये के हस्तांतरण से जुड़े साइबर धोखाधड़ी मामले में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि यह मामला प्रथम दृष्टया डिजिटल मुद्रा से संबंधित ‘‘संगठित साइबर धोखाधड़ी’’ का है और आरोपी से हिरासत में पूछताछ करने की जरूरत है।
शिकायत के अनुसार, आरोपी गौरव की मुलाकात शिकायतकर्ता से 2024 में एक साझा मित्र के जरिये हुई और बाद में उसने (गौरव ने) शिकायतकर्ता से एक करोड़ रुपये की डिजिटल मुद्रा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
आरोप है कि शिकायतकर्ता ने शुरू में अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, लेकिन आरोपी द्वारा निवेश के आकर्षक अवसरों का वादा किये जाने के बाद, शिकायतकर्ता ने उसे 1,11,247 ‘क्रिप्टोकरेंसी स्टेबलकॉइन’ हस्तांतरित कर दिए, जो लगभग एक करोड़ रुपये के बराबर है।
अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता के ‘वॉलेट’ से आरोपी द्वारा नियंत्रित और संचालित ‘वॉलेट’ में क्रिप्टोकरेंसी का हस्तांतरण किया गया। आरोपी ने इसका एक हिस्सा अपने पास रखने के बाद, कथित तौर पर लगभग 1,04,526 अमेरिकी डॉलर अपने सहयोगियों को हस्तांतरित कर दिए, जिसमें एक सह-आरोपी भी शामिल है।
दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश के आरोप में 2025 में प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी ने दावा किया कि उसे मामले में फंसाया गया है और उसने कहा कि वह शिकायतकर्ता और कोच्चि स्थित उसके सहयोगियों के बीच केवल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था।
अदालत ने कहा कि जांच में शामिल होने मात्र से ही आरोपी को अग्रिम जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता है, और उससे हिरासत में पूछताछ नहीं किये जाने की स्थिति में पुलिस ‘वॉलेट’ तक पहुंच नहीं पाएगी या मामले की तह तक नहीं जा पाएगी।
अदालत ने कहा, ‘‘चूंकि सह-आरोपियों ने अपनी पहचान और स्थान छिपाने के लिए व्हाट्सऐप कॉल और वीपीएन-आधारित संचार का इस्तेमाल किया था, इसलिए उनका पता लगाने के लिए वर्तमान आरोपी से पूछताछ करने की जरूरत है।
अदालत ने 29 मई को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘अब तक की गई जांच से यह भी संकेत मिलता है कि यह अपराध एक बड़े संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा है जिसमें कई आरोपी डिजिटल प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड संचार ऐप, वीपीएन सेवाओं और केवाईसी (ग्राहक को जानो) सत्यापन के बिना क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के माध्यम से समन्वय में काम कर रहे हैं। इसकी स्पष्ट रूप से विस्तृत जांच की आवश्यकता है।’’
अदालत ने कहा कि इसलिए बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने और धोखाधड़ी की राशि का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करने की जरूरत है।
आरोपी के फरार होने की आशंका और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि धोखाधड़ी वाली राशि अब तक बरामद नहीं हुई है, अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इस समय अग्रिम जमानत देना रकम को हासिल करने की कार्यवाही और जारी जांच, दोनों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।
अदालत ने कहा, ‘‘अदालत को आवेदक को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं मिला। इसलिए, यह आवेदन खारिज किया जाता है।’’
भाषा सुभाष वैभव
वैभव

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