मणिपुर में हत्याओं के विरोध में बंद से जनजीवन प्रभावित
मणिपुर में हत्याओं के विरोध में बंद से जनजीवन प्रभावित
इंफाल, 20 अप्रैल (भाषा) मणिपुर के कई पहाड़ी और घाटी के जिलों में सोमवार को अलग-अलग संगठनों द्वारा किये गए बंद के आह्वान के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। बंद का आह्वान इस महीने की शुरुआत में अलग-अलग जगहों पर संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा दो बच्चों और कुछ नागरिकों की हत्या के विरोध में किया गया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि घाटी के सभी पांच जिलों (जहां मेइती समुदाय के लोग रहते हैं) और उखरुल तथा सेनापति जिलों के नगा-बहुल इलाकों में शिक्षण संस्थान और बाजार बंद रहे, जबकि सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन के साधन भी नहीं दिखे।
हत्याओं के विरोध में इंफाल घाटी के विभिन्न हिस्सों में (जिनमें राज्य की राजधानी के उरीपोक और नागाराम इलाके भी शामिल हैं) धरने दिए गए।
महिला संगठन ‘मीरा पैबी’ ने बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में 7 अप्रैल को हुए बम हमले के विरोध में रविवार से पांच दिवसीय ‘बंद’ का आह्वान किया है। इस हमले में सोते समय 5 साल के एक बच्चे और उसकी छह महीने की बहन की मौत हो गई थी, जबकि उनकी माँ घायल हो गई थीं।
इस घटना के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भीड़ ने एक नजदीकी सीआरपीएफ कैंप पर धावा बोल दिया और इस दौरान हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई तथा लगभग 30 अन्य घायल हो गए।
‘यूनाइटेड नगा काउंसिल’ ने भी सोमवार से शुरू होने वाले तीन-दिवसीय ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया है। यह कदम 18 अप्रैल को एक सेवानिवृत्त सैनिक और एक अन्य व्यक्ति की मौत के विरोध में उठाया गया है। इन दोनों की मौत तब हुई, जब संदिग्ध उग्रवादियों ने इंफाल से उखरुल जा रहे नागरिकों के वाहनों के एक काफिले पर गोलीबारी की थी।
मणिपुर बार एसोसिएशन और मणिपुर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के तत्वावधान में सोमवार को वकीलों के एक समूह ने उरीपोक स्थित चेइराप अदालत परिसर के सामने प्रदर्शन किया।
मणिपुर मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष खाइदेम मणि ने पत्रकारों से कहा, ‘वकीलों का समुदाय ट्रोंगलाओबी में हुई घटना की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि दोषियों को पकड़ने के लिए सघन तलाशी अभियान चलाया जाए।’
उन्होंने कहा कि केवल एनआईए को मामला सौंप देने से इस मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता, सरकार को अपनी शक्तियों का उचित इस्तेमाल करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दोनों मामलों की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपने का फैसला किया है।
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप

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