बंगाल सरकार ने अवैध रूप से रहे विदेशियों के लिए निरुद्ध केंद्र बनाने का निर्देश दिया

बंगाल सरकार ने अवैध रूप से रहे विदेशियों के लिए निरुद्ध केंद्र बनाने का निर्देश दिया

बंगाल सरकार ने अवैध रूप से रहे विदेशियों के लिए निरुद्ध केंद्र बनाने का निर्देश दिया
Modified Date: May 24, 2026 / 05:51 pm IST
Published Date: May 24, 2026 5:51 pm IST

कोलकाता, 24 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अवैध रूप से देश में रहने के आरोप में ‘‘गिरफ्तार किये गए विदेशियों’’ के साथ-साथ ‘‘निर्वासन, या रिहाई के बाद स्वदेश वापसी की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों’’ को रखने के लिए निरुद्ध केंद्र बनाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग द्वारा शनिवार को जारी एक अधिसूचना में, देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के निर्वासन की प्रक्रिया के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों का उल्लेख किया गया है।

इसमें कहा गया, ‘‘इस संबंध में, यह अनुरोध किया जाता है कि जिले में गिरफ्तार किये गए विदेशियों के साथ-साथ निर्वासन/स्वदेश वापसी की प्रतीक्षा कर रहे रिहा विदेशी कैदियों के लिए निरुद्ध केंद्र स्थापित करने के लिए पहल/उचित कार्रवाई की जाए।’’

राज्य के सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए इस पत्र में गृह मंत्रालय के दो मई 2025 के एक पत्र का उल्लेख किया गया है, जिसमें ‘‘देश (भारत) में अवैध रूप से रहने के आरोप में पकड़े गए बांग्लादेशियों/रोहिंग्याओं के निर्वासन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में बताया गया है।’’

इस आदेश की प्रतियां पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक, सभी पुलिस आयुक्तालयों, पुलिस अधीक्षकों और कोलकाता स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को भी भेजी गईं।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कदम केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप हिरासत और प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जिलों को आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए कहा गया है ताकि निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशियों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने तक व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके।’’

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘यह आदेश प्रक्रियात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिला प्रशासन निर्धारित मानदंडों के अनुसार ऐसे मामलों से निपटने के लिए तैयार रहे।’’

भाषा धीरज सुभाष

सुभाष


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