भीमताल में निजी संस्थान की छात्रा की मौत का मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, पिता ने मांगा इंसाफ
भीमताल में निजी संस्थान की छात्रा की मौत का मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, पिता ने मांगा इंसाफ
नैनीताल, 23 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने लखनऊ की रहने वाली छात्रा वास्वी तोमर की भीमताल के एक छात्रावास में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया, जिसके कारण उसे लखनऊ में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करानी पड़ी ।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने सरकार को 28 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
तोमर भीमताल में स्थित ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय में बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं और पिछले साल छात्रावास के अपने कमरे में बेहोश पाई गई थी और संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई थी।
यह याचिका लखनऊ निवासी और मृतका के पिता राम कृष्ण तोमर ने दायर की है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।
तोमर ने याचिका में कहा कि उनकी बेटी ने वरिष्ठ छात्रों द्वारा रैगिंग किए जाने की शिकायत की थी और वह इन घटनाओं से बहुत परेशान थी।
संस्थान के पदाधिकारियों ने कथित तौर पर परिवार को बताया कि छात्रा अपने कमरे में बेहोश पाई गयी जिसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिक्षण संस्थान के पदाधिकारियों के दबाव में भवाली पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद परिवार ने लखनऊ पुलिस में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करायी । आगे की जांच के लिए लखनऊ पुलिस ने उसे भवाली पुलिस थाने को भेज दिया।
‘जीरो एफआईआर’ एक ऐसी प्राथमिकी है जिसे घटना स्थल/अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना किसी भी पुलिस थाने में दर्ज किया जा सकता है और बाद में इसे उपयुक्त पुलिस थाने में स्थानांतरित किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भवाली पुलिस अब भी मामले की जांच नहीं कर रही है।
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की है।
भाषा सं दीप्ति धीरज
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