बिरला ने नेताओं को पत्र लिखकर सदन में बैनर, तख्तियां दिखाने और अन्य व्यवहार पर चिंता व्यक्त की
बिरला ने नेताओं को पत्र लिखकर सदन में बैनर, तख्तियां दिखाने और अन्य व्यवहार पर चिंता व्यक्त की
नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कुछ सांसदों द्वारा सदन के अंदर बैनर, तख्तियां, पोस्टर दिखाने और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपने सदस्यों के बीच अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
लोकसभा में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को लिखे पत्र में, बिरला ने कहा कि सदन की हमेशा से गरिमापूर्ण चर्चा और संवाद की गौरवशाली परंपरा रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से, देश के संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और प्रतिष्ठा को कुछ सदस्यों द्वारा—सदन के भीतर और बाहर, तथा संसद परिसर के भीतर—कमजोर किया जा रहा है।
बिरला ने कहा, ‘जिस तरह से बैनर, तख्तियां और पोस्टर प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है और सदन व संसद भवन परिसर के अंदर जिस तरह का आचरण और व्यवहार प्रदर्शित किया जा रहा है, वह हम सभी के लिए गहरी चिंता का विषय है।’
उन्होंने हिंदी में लिखे पत्र में कहा, ‘हम सभी को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से इस स्थिति पर गंभीरता से विचार-विमर्श और विश्लेषण करने की आवश्यकता है।’
यह पत्र राजनीतिक दलों के नेताओं को ऐसे समय में भेजा गया है, जब लोकसभा में बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया था।
बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए विपक्षी दलों ने उन पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि वे उन्हें बोलने का मौका नहीं देते हैं।
बिरला ने पत्र में कहा कि अतीत में जब भी सदन के भीतर आचरण और व्यवहार के मानकों में गिरावट महसूस की गई, तो सभी राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों द्वारा समय-समय पर सम्मेलन आयोजित किए गए, जहां देश के लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा और प्रतिष्ठा के संरक्षण व संवर्धन पर चर्चा और संवाद आयोजित किए गए।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में भी चर्चा हुई है और प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
बिरला ने कहा, ‘मैंने कई अवसरों पर—चाहे वह कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठकें हों, राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ मुलाकातें हों या अन्य अवसर—आपसे आचरण और व्यवहार के उच्च मानकों को बनाए रखने का आग्रह किया है।’
उन्होंने कहा, ‘मेरा विनम्र अनुरोध है कि पूरा देश हमारे आचरण और व्यवहार को देखता है और संसद से जाने वाला संदेश देश के सभी लोकतांत्रिक संस्थानों में गूँजता है।’
अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की उच्च गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए अब गंभीर चिंतन और आत्मनिरीक्षण करने का समय आ गया है
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व और सदन में सभी दलों के नेताओं को सदन व संसद भवन परिसर के भीतर अपने सदस्यों के बीच अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘यदि हम सभी इस दिशा में सामूहिक प्रयास करें, तो संसदीय लोकतंत्र में जनता का विश्वास निश्चित रूप से और मजबूत होगा तथा सदन की प्रतिष्ठा और मर्यादा में निरंतर वृद्धि होगी। मुझे विश्वास है कि आप सभी इस महान संस्था की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने में अपना पूरा सहयोग देंगे।’
उन्होंने कहा, ‘लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में मैं यह पत्र आपको केवल एक औपचारिक संदेश के रूप में नहीं लिख रहा हूं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी की भावना के साथ लिख रहा हूं।’
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप

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