शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश पर आए फैसले के लिए भाजपा जिम्मेदार : मंत्री वासावन

शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश पर आए फैसले के लिए भाजपा जिम्मेदार : मंत्री वासावन

शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश पर आए फैसले के लिए भाजपा जिम्मेदार : मंत्री वासावन
Modified Date: March 14, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: March 14, 2026 4:14 pm IST

कोट्टायम (केरल), 14 मार्च (भाषा) केरल के देवस्वओम मंत्री वी. एन. वासवन ने शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले 2018 के उच्च न्यायालय के फैसले के लिए शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दोषी ठहराया और कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार का वर्तमान रुख वही है जो 2007 में शीर्ष अदालत के समक्ष दायर हलफनामे में था।

वह उच्चतम न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ के समक्ष राज्य सरकार द्वारा दायर किए जाने वाले हलफनामे के संबंध में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे, जिसमें मासिक धर्म वाली उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के संबंध में सरकार की स्थिति स्पष्ट की जानी है।

उन्होंने कहा कि 2018 का फैसला भाजपा से जुड़ी महिला अधिवक्ताओं द्वारा उच्चतम न्यायालय का रुख करने के बाद आया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 2007 में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा गया था कि इस मुद्दे का फैसला धार्मिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए। हम अब भी उसी रुख पर कायम हैं।’’

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं के प्रवेश पर फिलहाल राज्य सरकार का रुख नहीं मांगा है, बल्कि कुछ संवैधानिक मुद्दों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

मंत्री ने कहा, ‘‘हमने महाधिवक्ता और संवैधानिक विशेषज्ञों को उच्चतम न्यायालय में जवाब देने के लिए नियुक्त किया है। वे तदनुसार जवाब देंगे।’’

उन्होंने कहा कि अगर अदालत इस मामले पर राज्य सरकार का रुख जानना चाहेगी तो उसे प्रस्तुत किया जाएगा।

मंत्री ने विपक्ष की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वे विभिन्न मुद्दों पर बार-बार अदालतों का रुख करते हैं और हर बार प्रतिकूल जवाब लेकर लौटते हैं।

जब उनसे उच्चतम न्यायालय द्वारा सभी उम्र की महिलाओं को शबरिमला में प्रवेश करने की अनुमति दिए जाने वाले फैसले के बाद 2018 में राज्य सरकार की कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई व्याख्या नहीं की जानी चाहिए क्योंकि सरकार ने 2007 के हलफनामे में पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया था।

उन्होंने कहा, “अगर उच्चतम न्यायालय कोई फैसला सुनाता है, तो क्या हम उसके खिलाफ कुछ कह सकते हैं? महिलाओं के प्रवेश का फैसला देश की शीर्ष अदालत का था।”

उन्होंने कहा कि 2018 का फैसला भाजपा से जुड़ी महिला अधिवक्ताओं द्वारा शीर्ष अदालत का रुख करने के बाद आया।

उन्होंने कहा, ‘‘अब वे छिप रहे हैं। दरअसल, वे इसके पक्ष में खड़े थे। लेकिन अब वे अलग रुख अपना रहे हैं।’’

भाषा यासिर अविनाश

अविनाश


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