बॉन जलवायु सम्मेलन : भारत ने जलवायु वित्तपोषण के घटते स्तर पर चिंता जतायी

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बॉन जलवायु सम्मेलन : भारत ने जलवायु वित्तपोषण के घटते स्तर पर चिंता जतायी

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 04:35 PM IST,
    Updated On - June 9, 2026 / 04:35 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) जर्मनी में भारतीय दूतावास के द्वितीय सचिव ने बॉन में संयुक्त राष्ट्र के मध्य-वर्षीय जलवायु सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर कहा कि भारत पुनर्भरण और सहयोग समेत जलवायु वित्तपोषण के घटते स्तर तथा बढ़ते अनुकूलन आर्थिक अंतर से चिंतित है।

इन बैठकों को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि ढांचे (यूएनएफसीसीसी) के तहत सहायक निकायों का 64वां सत्र (एसबी64) कहा जाता है जहां नवंबर में तुर्किये के अंताल्या में होने वाले वार्षिक जलवायु सम्मेलन (सीओपी31) से पहले प्रमुख जलवायु एजेंडों को अंतिम रूप दिया जायेगा।

द्वितीय सचिव हरकीरत सिंह रंधावा ने सोमवार को उद्घाटन सत्र में अपने बयान में कहा, “भारत का मानना ​​है कि अंतरराष्ट्रीय जलवायु एजेंडा को अब कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। समानता और ऐतिहासिक उत्तरदायित्व को इस चरण का मार्गदर्शन करते रहना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को गरीबी उन्मूलन, ऊर्जा सुलभता बढ़ाने और अपने सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त कार्बन मार्जिन की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए विकसित देशों को उत्सर्जन में तेजी से कटौती करके नेतृत्व करना चाहिए, जिसमें आवश्यकतानुसार नकारात्मक उत्सर्जन भी शामिल है।

रंधावा ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत जलवायु बहुपक्षवाद के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसके प्रभावी कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में, जलवायु संधियों के तहत अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना हमारी सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिए।’’

भाषा

राजकुमार मनीषा

मनीषा