सीआईसी ने डीओपीटी से सूचना अधिकार प्रभाग के गठन संबंधी रिकॉर्ड तलाशने को कहा

सीआईसी ने डीओपीटी से सूचना अधिकार प्रभाग के गठन संबंधी रिकॉर्ड तलाशने को कहा

सीआईसी ने डीओपीटी से सूचना अधिकार प्रभाग के गठन संबंधी रिकॉर्ड तलाशने को कहा
Modified Date: June 9, 2026 / 08:16 pm IST
Published Date: June 9, 2026 8:16 pm IST

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को निर्देश दिया है कि वह अपने सूचना अधिकार (आईआर) प्रभाग की स्थापना से जुड़े रिकॉर्ड तलाशने के लिए नए सिरे से प्रयास करे और उन्हें सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदक को उपलब्ध कराए।

सीआईसी ने कहा कि रिकॉर्ड नहीं मिलने की स्थिति में विभाग को उनके उपलब्ध नहीं होने के संबंध में हलफनामा दाखिल करना होगा।

यह निर्देश उस अपील का निपटारा करते हुए दिया गया जो एक आरटीआई आवेदन से जुड़ी थी। आवदेन में डीओपीटी में आईआर प्रभाग के गठन, पुनर्गठन या स्थानांतरण से संबंधित कार्यालय आदेशों की प्रतियां और उन फाइलों का ब्योरा मांगा गया था, जिनमें ऐसे आदेश जारी किए गए थे।

आवेदक ने अधिकारियों द्वारा यह बताए जाने के बाद सीआईसी का रुख किया था कि मांगी गई जानकारी उनके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।

सुनवाई के दौरान डीओपीटी के प्रशासन प्रभाग और आईआर प्रभाग के प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिल सका।

डीओपीटी ने आयोग के समक्ष अपने जवाब में कहा कि किसी विभाग के भीतर काम का आवंटन और वितरण एक नियमित प्रशासनिक मामला है और ‘‘इसके लिए अपने आप में एक अलग प्रभाग के गठन या उसके संबंध में विशिष्ट आदेशों की आवश्यकता नहीं है।’’

विभाग ने कहा कि आईआर प्रभाग के गठन से जुड़े रिकॉर्ड का पता लगाने के प्रयास किए गए, लेकिन ‘‘वे नहीं मिल सके।’’

विभाग ने प्रभाग की मौजूदा भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि आईआर प्रभाग ‘‘सीआईसी के स्थापना संबंधी मामलों, आरटीआई अधिनियम के प्रचार-प्रसार के वार्षिक कार्यक्रम और आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल से जुड़े मामलों’’ को देखता है, जबकि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम से संबंधित मामलों को आईआर-दो अनुभाग संभालता है।

सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने इस बात पर गौर किया कि अपीलकर्ता ने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के विभाग के दावे पर आपत्ति जताई है। उसने डीओपीटी को निर्देश दिया कि वह अपने डेटाबेस और रिकॉर्ड को गंभीरता से खंगाले तथा दस्तावेज मिलने पर तीन सप्ताह के भीतर जानकारी उपलब्ध कराए।

आयोग ने कहा कि यदि रिकॉर्ड तब भी नहीं मिलते हैं तो संबंधित केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) गैर-न्यायिक ‘स्टाम्प पेपर’ पर हलफनामा दाखिल कर उनके उपलब्ध नहीं होने की पुष्टि करेगा और उसकी एक प्रति अपीलकर्ता को उपलब्ध कराएगा।

भाषा

सिम्मी सुरेश

सुरेश


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