जाली हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी ममता के कालीघाट स्थित आवास पहुंची
जाली हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी ममता के कालीघाट स्थित आवास पहुंची
कोलकाता, आठ जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की एक टीम विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में मंगलवार को कोलकाता के कालीघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पहुंची, जो पार्टी का केंद्रीय कार्यालय भी है।
सूत्रों ने बताया कि सीआईडी अधिकारी कालीघाट पुलिस थाने की एक टीम और महिला पुलिस कर्मियों के साथ दोपहर के आसपास तृणमूल कांग्रेस के 30बी हरीश चटर्जी मार्ग स्थित केंद्रीय कार्यालय पहुंचे।
सीआईडी ने इससे पहले विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नामित किए जाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर किए जाने से जुड़े मामले के सिलसिले में जानकारी मांगते हुए पार्टी नेताओं को नोटिस जारी किए थे।
मौके पर मौजूद सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से नोटिस के जवाब में दिए गए जवाब के आधार पर परिसर की तलाशी लेने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था।
सीआईडी के एक अधिकारी ने बताया, “अभिषेक बनर्जी ने अपने जवाब में कहा कि विधायकों के हस्ताक्षर पार्टी के 30बी हरीश चटर्जी मार्ग स्थित केंद्रीय कार्यालय में लिए गए थे। इसी बयान के आधार पर हम जांच के सिलसिले में यहां आए हैं।”
हालांकि, अधिकारी ने कहा कि जांच टीम को परिसर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई, जिसके चलते कार्यालय का प्रबंधन करने वालों के साथ संक्षिप्त बहस हुई।
तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी ने अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में तलाशी का विरोध किया।
उन्होंने कहा, “हमने अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में सीआईडी को परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी। उनके (अभिषेक) आने के बाद सीआईडी परिसर की तलाशी ले सकती है।”
यह मामला 19 मई को विधानसभा सचिवालय में जमा किए गए एक विवादास्पद पत्र से जुड़ा है, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में नामित किया गया था। पत्र पर तृणमूल के लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने की बात कही गई है।
हालांकि, बागी विधायकों रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि पत्र पर मौजूद कुछ हस्ताक्षर जाली थे, जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी जांच शुरू की गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन को लेकर तृणमूल कांग्रेस में बगावत छिड़ गई है। संकट तब और बढ़ गया, जब तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी नेतृत्व की अवहेलना करते हुए आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी का इस पद के लिए समर्थन किया।
पिछले हफ्ते बागी खेमे ने विधायक दल पर नियंत्रण हासिल कर लिया, रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता प्राप्त कर ली, जिसके परिणामस्वरूप 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से पार्टी में पहली बार विभाजन हुआ।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

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