मदुरै, विलुपुरम में बेरोजगारी के खिलाफ ‘कॉकरोच रैली’ निकाली गई
मदुरै, विलुपुरम में बेरोजगारी के खिलाफ ‘कॉकरोच रैली’ निकाली गई
मदुरै/विलुपुरम, 24 मई (भाषा) मदुरै और विलुपुरम में रविवार को सैकड़ों युवा सड़कों पर उतर आए और तमिलनाडु में अपनी तरह की पहली ‘कॉकरोच रैली’ निकाली।
यह प्रदर्शन बेरोजगारी और उच्चतम न्यायालय के एक वरिष्ठ न्यायाधीश की ओर से हाल में बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने के घटनाक्रम का विरोध जताने के लिए आयोजित किया गया था।
मदुरै में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने संयुक्त रूप से ‘कॉकरोच रैली’ निकाली। इस रैली को ‘कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)’ के समर्थकों का भरपूर समर्थन मिला।
पिछले हफ्ते भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान ‘‘कॉकरोच’’ और ‘‘परजीवी’’ जैसी टिप्पणियां की थीं, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इन टिप्पणियों के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का एक व्यंग्यात्मक डिजिटल संगठन अस्तित्व में आया था।
सीजेआई ने बाद में स्पष्ट किया कि ‘‘फर्जी डिग्रियों’’ के माध्यम से विधि पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों पर लक्षित उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से उद्धृत किया गया था।
‘कॉकरोच रैली’ गांधी संग्रहालय परिसर से शुरू हुई। इसमें शामिल युवा हाथों में “हमें काम चाहिए, हमें जीवन चाहिए, हमें सम्मान चाहिए” और “बेरोजगार कॉकरोच की रैली” लिखी तख्तियां थामे हुए थे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और उस पर हर साल दो करोड़ नौकरियां प्रदान करने का वादा निभाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। उन्होंने पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर भी केंद्र की आलोचना की।
‘कॉकरोच रैली’ थमुक्कम ग्राउंड में तमिल अन्नाई की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन के साथ समाप्त हुई।
उधर, विलुपुरम में नये बस स्टैंड के पास भी डीवाईएफआई के जिला आयोजक अरिवलगन के नेतृत्व में इसी तरह का विरोध-प्रदर्शन किया गया।
प्रमुख आयोजक सेल्वम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “भारत के युवा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति वर्ष दो करोड़ नौकरियां प्रदान करने के अधूरे वादे के खिलाफ ऑनलाइन एकजुट हुए हैं। हम आज सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार से तत्काल रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।”
भाषा
शुभम पारुल
पारुल

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