जिला अदालतों की समिति ने आर्थिक क्षेत्राधिकार मुद्दे पर डीएचसीबीए के हड़ताल आह्वान की निंदा की

जिला अदालतों की समिति ने आर्थिक क्षेत्राधिकार मुद्दे पर डीएचसीबीए के हड़ताल आह्वान की निंदा की

जिला अदालतों की समिति ने आर्थिक क्षेत्राधिकार मुद्दे पर डीएचसीबीए के हड़ताल आह्वान की निंदा की
Modified Date: May 24, 2026 / 11:00 am IST
Published Date: May 24, 2026 11:00 am IST

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) दिल्ली के सभी जिला अदालत विधिज्ञ संघों की समन्वय समिति ने जिला अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार में प्रस्तावित वृद्धि के विरोध में सोमवार को हड़ताल करने के दिल्ली उच्च न्यायालय विधिज्ञ संघ (डीएचसीबीए) के आह्वान का विरोध किया है।

समिति ने शनिवार देर रात जारी एक परिपत्र में जिला अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार (वित्तीय सीमा) को मौजूदा दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की ‘‘वैध’’ और पुरानी मांग के विरोध में डीएचसीबीए द्वारा किए गए हड़ताल के आह्वान की ‘‘कड़ी निंदा और विरोध’’ किया।

समिति ने कहा, ‘‘समन्वय समिति द्वारा उठाई गई मांग को केवल इसलिए ‘अनुचित’ या ‘अन्यायपूर्ण’ नहीं कहा जा सकता कि इससे अधिवक्ताओं के एक विशेष वर्ग के पेशेवर हित प्रभावित हो सकते हैं।’’

परिपत्र में कहा गया, ‘‘महंगाई और आर्थिक विकास, नागरिकों/वादकारियों के लिए न्याय तक बेहतर पहुंच, न्यायिक बुनियादी ढांचे के प्रभावी इस्तेमाल और दिल्ली उच्च न्यायालय में लगातार बढ़ते लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए समिति ने व्यापक जनहित में यह मांग लगातार और वैध रूप से उठाई है।’’

समिति के अध्यक्ष डी. के. शर्मा और महासचिव विजय बिश्नोई द्वारा हस्ताक्षरित परिपत्र में कहा गया कि लगातार किए गए सामूहिक प्रयासों के कारण यह मुद्दा अब उच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों वाली समिति के समक्ष उन्नत चरण में पहुंच गया है और समिति मामले की समीक्षा कर रही है।

समिति ने कहा, ‘‘विचार-विमर्श के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि उच्च न्यायालय समिति प्रस्तावित वृद्धि की तात्कालिक आवश्यकता और उसके औचित्य को लेकर काफी हद तक सहमत है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में डीएचसीबीए का हड़ताल का आह्वान निर्णय प्रक्रिया में देरी करने और उसे पटरी से उतारने का जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है।’’

परिपत्र में रेखांकित किया गया कि जिला न्यायपालिका न्याय वितरण प्रणाली की रीढ़ है और अधिक आर्थिक मूल्य वाले मामलों का निपटारा करने के लिए पूरी तरह सक्षम, अनुभवी और संस्थागत रूप से सुसज्जित है।

समिति ने कहा, ‘‘दिल्ली के लोगों और सभी जिला अदालतों के वादकारियों को त्वरित तथा सुलभ न्याय पाने का अधिकार है। आर्थिक क्षेत्राधिकार में वृद्धि इस संवैधानिक और संस्थागत उद्देश्य को हासिल करने की दिशा में आवश्यक कदम है।’’

समिति के समन्वयक और नयी दिल्ली विधिज्ञ संघ के महासचिव तरुण राणा ने कहा, ‘‘हड़ताल संबंधी परिपत्र की विषय वस्तु से पता चलता है कि उन्हें केवल अपनी चिंता है जबकि आर्थिक क्षेत्राधिकार बढ़ाने का समन्वय समिति का आह्वान दिल्ली के लोगों के हित और लाभ के लिए है तथा इसका उद्देश्य त्वरित सुनवाई और लोगों के द्वार तक न्याय सुनिश्चित करना है।’’

भाषा सिम्मी अमित

अमित


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