(तस्वीर के साथ)
चेन्नई, 24 मई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की युवा शाखा के प्रमुख उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस पर तमिलनाडु में चुनावी लाभ के लिए ‘‘द्रमुक की पीठ में छुरा घोंपने’’ का आरोप लगाया है और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे कांग्रेस पर ‘‘फिर कभी भरोसा न करें।’’
उदयनिधि ने कहा, ‘‘20 वर्षों से अधिक समय तक कांग्रेस पार्टी हमारे सहारे आगे बढ़ी। आज उसने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। किसी को भी यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए। हमें कांग्रेस पर भविष्य में कभी भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही उसे फिर कभी अपने करीब आने देना चाहिए।’’
उदयनिधि ने शनिवार को यहां द्रमुक युवा शाखा की बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र में लगातार जीत के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बजाय कांग्रेस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि भाजपा की लगातार चुनावी सफलताओं का मुख्य कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ऐसा नहीं है। भाजपा की जीत का मुख्य कारण कांग्रेस पार्टी है। यह अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।’’
उदयनिधि ने पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गठबंधन के प्रति द्रमुक के पूर्ण समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि द्रमुक कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए ‘‘खून-पसीना’’ बहाया ताकि धर्मनिरपेक्षता की रक्षा की जा सके और भाजपा को तमिलनाडु से दूर रखा जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘इस चुनाव में भी लगभग अस्तित्वहीन कांग्रेस हमारे नेता के निर्देशों और द्रमुक कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत के कारण ही पांच सीट जीत सकी लेकिन जीतने के तुरंत बाद, वे सत्ता के लालच में भाग गए।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस में बुनियादी कृतज्ञता और राजनीतिक शिष्टाचार का अभाव है।
उदयनिधि ने कहा कि भले ही द्रमुक उसे सबक न सिखाए, तमिलनाडु के लोग जल्द ही उसे सबक सिखाएंगे।
हालिया चुनावी झटकों के बाद पार्टी की आंतरिक रणनीति पर ध्यान केंद्रित करते हुए द्रमुक नेता ने आरोप-प्रत्यारोप के बजाय व्यापक सुधार की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने खासतौर पर पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति में कमियों और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क साधने में नाकामी की ओर इशारा किया।
उन्होंने युवा इकाई के सदस्यों से कहा, ‘‘हमने बाहर प्रचार किया, लेकिन मुझे संदेह है कि हम अपने ही घरों के भीतर प्रचार करने में नाकाम रहे। अनजान लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के लिए बाहर जाने से पहले अपने परिवार के सदस्यों और बच्चों से उनकी समझ में आने वाली भाषा में राजनीति पर बात करें।’’
भाषा
सिम्मी सुभाष
सुभाष