यमुना जल समझौते को लेकर हुए नए एमओयू की प्रति सार्वजनिक किया जाए: अशोक गहलोत
यमुना जल समझौते को लेकर हुए नए एमओयू की प्रति सार्वजनिक किया जाए: अशोक गहलोत
जयपुर, 29 जून (भाषा) पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यमुना जल समझौते को लेकर राजस्थान सरकार एवं हरियाणा के बीच हुए नए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि राज्य की जनता से ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज छिपाना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विरुद्ध है।
गहलोत ने सोमवार को एक बयान में कहा कि यमुना जल समझौते को लेकर राज्य सरकार ने आज हरियाणा के साथ नया एमओयू किया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके हितों से जुड़े इस समझौते में किन शर्तों पर सहमति बनी है।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार करीब ढाई वर्ष पहले (17 फरवरी 2024) किए गए एमओयू को भी लोकसभा चुनाव तक छिपाकर रखा गया था तथा बाद में सामने आया कि उसमें पहले हरियाणा को 24,000 क्यूसेक पानी देने और शेष पानी राजस्थान को मिलने की शर्त थी।
कांग्रेस नेता गहलोत ने कहा, ‘‘यदि नए एमओयू में भी ऐसा है, तो यह 1994 के मूल समझौते की भावना के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि यमुना जल का वितरण सभी राज्यों को ‘उपलब्ध जल के अनुपात’ में होगा। किसी एक राज्य को प्राथमिकता या एकतरफा अधिकार नहीं है।’’
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को नई दिल्ली में यमुना जल परियोजना को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच एमओए किया गया। इस पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए।
गहलोत ने एमओयू को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा,‘‘मेरी मांग है कि आज हस्ताक्षरित नए एमओयू की प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए। जनता से ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज छिपाना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विरुद्ध है।’’
गहलोत के अनुसार राजस्थान के हित सर्वोपरि हैं और राज्य के जल अधिकारों से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भाषा पृथ्वी राजकुमार
राजकुमार

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