दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव विवाद: शिवकुमार ने पार्टी अनुशासन पर जोर दिया

दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव विवाद: शिवकुमार ने पार्टी अनुशासन पर जोर दिया

दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव विवाद: शिवकुमार ने पार्टी अनुशासन पर जोर दिया
Modified Date: April 14, 2026 / 08:39 pm IST
Published Date: April 14, 2026 8:39 pm IST

(फोटो के साथ)

बेंगलुरु, 14 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक में दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव विवाद के बाद उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर राज्य के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को पार्टी अनुशासन के महत्व पर जोर दिया, जबकि कुछ नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई ने सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर नई हलचलें पैदा कर दीं।

शिवकुमार ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी उम्मीदवार और उसके बाद के घटनाक्रमों के संबंध में निर्णय नेताओं के साथ परामर्श और जमीनी स्तर से मिली रिपोर्ट के आधार पर लिये गए, जिस पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कार्रवाई की।

उपमुख्यमंत्री की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को पद से हटाए जाने की पृष्ठभूमि में आई है। अहमद को इन आरोपों के बाद ‘तत्काल प्रभाव से मुक्त’ कर दिया गया कि उन्होंने दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम किया था।

अनुभवी विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण इस उपचुनाव की आवश्यकता आन पड़ी थी। कांग्रेस ने नौ अप्रैल को हुए चुनाव में उनके पोते समर्थ शमनूर को मैदान में उतारा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा, ‘‘यदि किसी भी दल में अनुशासन नहीं है, तो वह सुचारू रूप से नहीं चल सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने सभी को विश्वास में लेने के बाद उम्मीदवार पर फैसला किया था। हम हर दिन विभिन्न नेताओं के संपर्क में थे। उन सभी ने रिपोर्ट सौंपी और उसी के आधार पर मुख्यमंत्री ने (समर्थ को चुनावी मैदान में उतारने का) फैसला लिया।’

शिवकुमार ने उल्लेख किया कि इन घटनाक्रमों के बीच कुछ कांग्रेस नेताओं ने पद छोड़ दिए हैं।

दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीट पर उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी के भीतर अंतर्विरोध उभर आए थे। अल्पसंख्यक नेताओं के एक वर्ग ने निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का हवाला देते हुए इस समुदाय से उम्मीदवार बनाने की मांग की थी और प्रतिनिधित्व न मिलने पर असंतोष व्यक्त किया था।

हालांकि, नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद एक बागी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया, लेकिन खबरों के अनुसार नाराजगी बरकरार रही और कुछ नेता चुनाव प्रचार गतिविधियों से दूर रहे।

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश


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