‘डियर जाहिरा, विद लव’: विभाजन पर आधारित मार्मिक प्रेम कहानी
‘डियर जाहिरा, विद लव’: विभाजन पर आधारित मार्मिक प्रेम कहानी
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) बंटवारे के उथल-पुथल भरे दौर पर इम्तियाज अली की फिल्म ‘‘मैं वापस आऊंगा’’ के सिनेमाघरों में दर्शकों की भावनाओं को झकझोरने के बीच लेखक सचिन एनजी की किताब ‘‘डियर जाहिरा, विद लव’’ के जरिए इस विषय को साहित्य में आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह पुस्तक विभाजन के बाद की वास्तविक घटना से प्रेरित एक मार्मिक कहानी प्रस्तुत करती है।
‘ग्रेपवाइन बुक्स’ द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास मुख्य किरदारों, गुलाम अली और ज़ाहिरा रजा की जिंदगी के जरिए यह दिखाता है कि कैसे ‘‘प्यार सरहदों के पार भी कायम रहता है और जुदाई, तड़प और उम्मीद की एक बेहद मानवीय कहानी को जीवंत करता है।’’
लेखक ने एक बयान में कहा, ‘‘लोग समझते हैं कि विभाजन 1947 में हुई एक घटना भर थी, लेकिन उसका दर्द आज भी जिंदा है। जब भी सीमा के उस पार बसे अपने भाई की याद में किसी बहन की आंखें नम होती हैं, तब विभाजन की त्रासदी फिर से महसूस होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई सैनिक देश की रक्षा के लिए सीमा की ओर रवाना होता है, विभाजन की विरासत सामने आ जाती है। और जब भी एशिया कप में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला होता है, तब भी विभाजन का प्रभाव किसी न किसी रूप में दिखाई देता है।’’
सचिन अली और रजा की कहानी को जीवंत करते हैं, जिनकी जिंदगी 1947 की घटनाओं से बिखर गई थी। सरहद से अलग होने के बाद, अली लाहौर में हिंदू शरणार्थी शिविरों से चिट्ठियां लिखते हैं, जबकि रजा लखनऊ में अनिश्चितताओं के बीच उम्मीद का दामन थामे उनकी प्रतीक्षा करती रहती हैं।
पुस्तक के विवरण में कहा गया है, ‘‘उनकी कहानी इस बात की मार्मिक याद दिलाती है कि सीमाएं भले ही देशों को बांट दें, लेकिन वे प्रेम और मानवीय रिश्तों के बंधनों को हमेशा कमजोर नहीं कर सकतीं।’’
प्रकाशक के अनुसार, भावनाओं से भरे पत्रों के आदान-प्रदान के माध्यम से कही गई ‘‘डियर जाहिरा, विद लव’’ दो ऐसे लोगों की कहानी को जीवंत करती है, जिनका जीवन भारत-विभाजन की उथल-पुथल से गहराई से प्रभावित हुआ।
भाषा आशीष माधव
माधव

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